निकोलस मदुरो का जन्म नवंबर, 1962 को एक मजदूर परिवार में हुआ था। उनके पिता एक ट्रेड यूनियन लीडर रहे। मादुरो ने 1990 के दशक की शुरुआत में एक बस ड्राइवर के तौर पर काम किया था। इसी दौरान 1992 में सेना अधिकारी ह्यूगो शावेज ने तख्तापलट की नाकाम कोशिश की थी। मदुरो ने तब नौकरी छोड़ दी और शावेज को जेल से रिहा कराने के लिए कैंपेन किया। वह उनके वामपंथी राजनीतिक प्रोजेक्ट के पक्के समर्थक के तौर पर उभरे।
1998 में राजनीति में एंट्री
मादुरो ने अपने देश में राजनीति करने से पहले 1986 में एक साल के वैचारिक प्रशिक्षण के लिए क्यूबा गए थे। यह हाई स्कूल के बाद उनकी एकमात्र औपचारिक शिक्षा थी। साल 1998 में शावेज राष्ट्रपति बने तो मादुरो ने राजनीति में कदम रखा और विधायिका के सदस्य बने। वह नेशनल असेंबली के अध्यक्ष बने और बाद में विदेश मंत्री के रूप में काम किया। मादुरो देश के उपराष्ट्रपति भी रहे। वह शावेज के समय देश के बेहद ताकतवर शख्स बन चुके थे।
मादुरो ने वेनेजुएला के तेल धन से समर्थित अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर यात्राएं कींं और अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया। इसी के चलते शावेज ने अपनी मौत से पहले सार्वजनिक रूप से मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। वर्ष 2013 में अपने निधन से पहले राष्ट्र को दिए गए अपने अंतिम संबोधन में शावेज ने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी कहा था। ऐसे में शावेज की मौत के बाद मादुरो 2013 में राष्ट्रपति बन गए। इसके बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने हुए थे। अमेरिका के कैदी बनने के बाद अब उनका भविष्य संकट में है।














