नेपाल में बीते साल सितंबर में युवाओं का हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला था। इस प्रदर्शन के नतीजे में केपी ओली की सरकार गिर गई थी। इसके बाद देश में सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार है। अंतरिम सरकार ने मार्च में नए संसदीय चुनाव कराने का ऐलान किया है। नेपाल में राजशाही के समर्थन में यह पहली रैली नहीं है लेकिन बीते साल ओली की सरकार गिरने के बाद से ज्ञानेंद्र समर्थकों की यह पहला मार्च था।
राजा को वापस लाओ के नारे
एपी के मुताबिक, काठमांडू में रैली करने वाले लोग हाथों में पोस्टर लिए हुए थे। इसमें देश में राजशाही लाने के समर्थन में नारे लिखे थे। रैली करने वाले लोगों ने ‘हम राजा से प्यार करते हैं’ और ‘राजा को वापस लाओ’ जैसे नारे लगाए। रैली में शामिल लोग राजा पृथ्वी नारायण शाह की मूर्ति के साथ सड़कों पर उतरे। रविवार को राजा पृथ्वी नारायण शाह की जयंती थी।
नेपाल में राजा पृथ्वी नारायण शाह ने 18वीं सदी में शाह वंश की शुरुआत की थी। राजवंश के आखिरी राजा ज्ञानेंद्र शाह को दो दशक पहले विरोध के बाद पद छोड़ना पड़ा था। नेपाल में 2008 में राजशाही खत्म कर दी गई थी और नेपाल एक गणतंत्र बन गया। राजशाही समर्थकों का कहना है कि मौजूदा निजाम बेहद भ्रष्ट है, ऐसे में राजा की वापसी होनी चाहिए।
अब राजशाही की विकल्प
प्रदर्शनकारी सम्राट थापा ने रैली के दौरान कहा, ‘इस देश के लिए आखिरी और एकमात्र विकल्प सिर्फ राजा और राजशाही ही है। मौजूदा हालात और युवाओं के आंदोलन के बाद देश ने जो रास्ता अपनाया है, उसे देखते हुए स्थिति को संभालने के लिए राजशाही को बहाल करने की जरूरत है।
राजशाही के समर्थन में पिछले साल मार्च में काठमांडू में प्रदर्शन हुए थे। राजशाही समर्थक रैली के दौरान दो लोग मारे गए थे। हालांकि रविवार की रैली शांतिपूर्ण रही। नेपाल की पहली अंतरिम महिला प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार इस साल मार्च में देश में चुनाव कराएगी।












