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  • न इलाज मिला न इंसाफ, दिल्ली में बेटे साहिल को खोने वाली मां का सवाल- एग्जाम के नाम पर आरोपी को बेल क्यों?

    नवीन निश्चल, नई दिल्ली: द्वारका के बागडोला में रहने वालीं इन्ना माकन के लिए उनका बेटा साहिल केवल उनकी संतान नहीं, बल्कि एक ‘सिंगल मदर’ के वर्षों के संघर्ष का वह गौरव था, जिस पर उन्हें हमेशा नाज रहता था। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर साहिल को इस काबिल बनाया कि वह जर्मनी और मैनचेस्टर जैसे शहरों


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    By Azad Hind Desk फरवरी 18, 2026
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    नवीन निश्चल, नई दिल्ली: द्वारका के बागडोला में रहने वालीं इन्ना माकन के लिए उनका बेटा साहिल केवल उनकी संतान नहीं, बल्कि एक ‘सिंगल मदर’ के वर्षों के संघर्ष का वह गौरव था, जिस पर उन्हें हमेशा नाज रहता था। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर साहिल को इस काबिल बनाया कि वह जर्मनी और मैनचेस्टर जैसे शहरों में अपना भविष्य संवारे, आज उसी बेटे की तस्वीरें और कपड़े उनके सीने से लगे हैं। इन्ना अक्सर अपने बेटे से कहती थीं, ‘बेटा, इस देश के सिस्टम में मत रहना, यहां से बाहर निकल जाओ, लेकिन नियति और प्रशासनिक अनदेखी को कुछ और ही मंजूर था।

    आज़ाद हिन्द बातचीत करते हुए वह बार-बार यही कहती रहीं कि मेरा बेटा बाहर जाने वाला था, सब तैयारी हो रही थी। उसका लास्ट सेमेस्टर बचा था। मैंने सिंगल मदर रहते हुए हुए बहुत मुश्किल से सरवाइव किया है, मैं बेटे को कभी भी इस कंट्री में रखना नहीं चाहती थी। मैं अपने बच्चे को अच्छी लाइफ देना चाहती थी। हमारे रिश्तेदार कहते थे कि इसे बाहर मत भेजना, वहां जाने के बाद बच्चे बदल जाते हैं, लेकिन मैं किसी की नहीं सुनती थी। साहिल के नजदीकी दोस्त मानस ने बताया कि कुछ दिन पहले उससे पूछा था कि मुझे जर्मनी और मैनचेस्टर का ऑफर मिला है, क्या तुम भी साथ में चलोगे, मैंने कहा कि मेरे सारे पैरंट्स यहीं रहते हैं। मैं तुम्हारे साथ बाहर नहीं जा पाऊंगा।

    आरोपी के पिता को भी घेरा

    उन्होंने आरोपी के पिता पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि वह जब खुद ट्रांसपोर्टर है, तो उसे क्या रूल्स नहीं पता है। कैसे सड़क पर गाड़ी चलती है, क्या-क्या डॉक्युमेंट्स होने चाहिएं। क्या नियम कानून है, क्या वह पैसे वाला है, इसलिए ओवर कॉन्फिडेंट है, क्या कुछ भी कर लेगा। जिस बच्चे को मैंने पाई-पाई जोड़कर, पढ़ा लिखाकर बड़ा किया, अंतिम समय में इस सिस्टम ने मुझे उसे गले भी लगाने नहीं दिया। इसलिए मैं कहती थी बेटा तुझे यहां नहीं रहना है।

    ‘मेरा बेटा दो घंटे तक रोड पर तड़पता रहा’

    जिस कार से हादसा हुआ, उस पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि जिस कार का 13 चालान ओवरस्पीड और बिना ड्राइविंग लाइसेंस चलाने को लेकर हो चुका हो और वह फिर भी रोड पर मौत बनकर दौड़ रही हो, तो इस सिस्टम को क्या कहा जाए ? मेरा बेटा 2 घंटे तक सड़क पर तड़पकर मर गया, ऐम्बुलेंस खड़ी थी, लेकिन मेरे पहुंचने के बाद उसमें डालकर ले गए। पहले ले जाते तो शायद मेरा बच्चा जिंदा होता।

    सरकारी हॉस्पिटल ले जाने पर सवाल

    इन्ना माकन का कहना है कि मैं बेटे के क्रिया-कर्म में बिजी थी और उधर आरोपी को बोर्ड एग्जाम के नाम पर छोड़ दिया गया। आप किसी को मार दो और बेल मिल जाएगी। सबको पता है कि वह नाबालिग है, लाइसेंस नहीं है और वह ओवरस्पीड गाड़ी के अंदर बैठकर रील बना रहा था। रील के चक्कर में हमारे बेटे की जान ले ली। उन्होंने इंदिरा गांधी हॉस्पिटल में बेटे को ले जाने पर भी सवाल खड़ा किया। वह कहती है, ‘मुझे पता है कि वहां अच्छी सुविधा नहीं है, लेकिन मेरे बेटे को उसी अस्पताल में लेकर गए। मैं उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में लेकर जाना चाहती थी, लेकिन मुझे नहीं ले जाने दिया।’

    एक्सिडेंट का एक वीडियो भी आया

    हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें दिख रहा है कि स्कॉर्पियो के सामने से साहिल बाइक से दूसरी तरफ से आ रहे हैं। कुछ ही देर बाद बाइक और स्कॉर्पियो की टक्कर हो जाती है। पता चला है कि यह वीडियो स्कॉर्पियो चला रहे नाबालिग लड़के की बहन ने बनाया है। इसकी पुष्टि आरोपी के पिता और पुलिस ने भी की है। इसे पुलिस के सामने सबूत के रूप में दिया गया है।

    ‘मुझे 3 फरवरी को 1 बजकर 19 मिनट पर पुलिस की कॉल आई।

    पुलिस ने बताया गया कि मुझे यहां पर एक बाइक मिली है- R-151 बाइक का एक्सिडेंट हुआ है, लड़के की ऑन द स्पॉट मौत हो गई है। मैं दौड़ते-भागते वहां पहुंची। सड़क पर मेरा बच्चा पढ़ा था। उसकी हालत बेहद खराब थी। बच्चे की स्पोर्ट्स बाइक के तीन टुकड़े हो गए थे। जैकेट के भी चिथड़े हो रखे थे। मैं 10 मिनट तक चिल्लाती रही।

    वहां ऐम्बुलेंस खड़ी थी, लेकिन बच्चा वहीं रोड पर पड़ा था। मैं 1:30-1:35 तक पहुंची थी। मुझसे पहले मेरे ऑफिस की लड़की वहां पहुंच चुकी थी। मेरे एक पड़ोसी भी थे। मेरे जाने के 10 मिनट बाद मेरे बच्चे को उठाया। उसे ऐम्बुलेंस में डालकर दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया। मैं भी पीछे-पीछे पहुंची। हॉस्पिटल में मैं 4 घंटे तक चिल्लाती रही। मैं अपने बच्चे की बॉडी मांग रही थी। मैं अपने बच्चे के लिए लास्ट चांस लेना चाहती थी। मैं अपने खर्चे पर बच्चे को प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाना चाहती थी। लेकिन मेरे लाख कहने पर भी किसी ने मेरे बच्चे को नहीं दिया। बाद में उसे मोर्चरी ले गए। फिर पोस्टमॉर्टम के बाद मुझे मेरे बच्चे की बॉडी मिली।

    बेटे को विदेश भेजना चाहती थी मां

    सिंगल मदर होने के कारण मैंने 23 साल तक बच्चे को अकेले पाला था। मैं हमेशा से चाहती थी वो इस कंट्री में न रहे। मैं यहां के हालात, टॉर्चर देखकर शुरू से उसे कहती थी बेटा कहीं और चले जाना।’ ये बातें इन्ना माकन ने कही। इन्ना के 23 वर्षीय बेटे साहिल धनेश्रा की बीते दिनों दिल्ली में हुए एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

    इन्ना ने बताया कि जिस एसयूवी से बेटे की बाइक में टक्कर लगी, उस पर पहले से 13 चालान थे। ये सभी चालान ओवरस्पीड के है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी को अंतरिम जमानत मिल गई है। मैं पुलिस से मिली तो कहा गया कि निष्पक्ष जांच होगी। सोचिए कि ओवरस्पीड के 13 चालान फिर भी उसे कोर्ट ने जमानत दे दी।

    भविष्य को लेकर पॉज़िटिव थे साहिल

    साहिल भविष्य को लेकर कितने पॉजिटिव थे, यह उनके कमरे की दीवारें बता रहीं है। साहिल ने अपना ‘विजन बोर्ड’ भी बना रखा था। साहिल ने छत पर लिखा था- ‘$1,000,000 Year!’ और ‘2025 विल बी माई ईयर’। दीवार पर कई कोट में एक है ‘Obsession is gonna beat talent’ (जुनून टैलेंट को मात दे देगा)।

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