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  • पटाखे जलाने वाले देशद्रोही, कह दो कि सब मर जाए, सुप्रीम कोर्ट की गलती: प्रदूषण पर मेनका गांधी ने क्या कह दिया

    नई दिल्ली: बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को लेकर बहुत ही विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जो लोग पटाखे जलाते हैं, वह देशद्रोही हैं। मेनका यहीं तक नहीं रुकी हैं, उन्होंने इस समस्या के लिए सुप्रीम कोर्ट को भी दोषी ठहराया दिया है


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    By Azad Hind Desk जनवरी 5, 2026
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    नई दिल्ली: बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को लेकर बहुत ही विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जो लोग पटाखे जलाते हैं, वह देशद्रोही हैं। मेनका यहीं तक नहीं रुकी हैं, उन्होंने इस समस्या के लिए सुप्रीम कोर्ट को भी दोषी ठहराया दिया है और कहा है कि वह आजकल मनमाने ऑर्डर देने लगा है। उन्होंने कहा कि या तो पटाखे पर बैन लगे या कह दिया जाए कि ‘सब लोग मर जाओ।’

    ‘पटाखा इस्तेमाल करने वाले देशद्रोही’

    दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा है, ‘जो लोग पटाखे इस्तेमाल करते हैं, वो देशद्रोही हैं…इसके लिए मेरे मन में और कोई शब्द नहीं है।’ उन्होंने कहा है कि दिवाली, दशहरा, शादी और न्यू ईयर पर लोग जो पटाखे जलाते हैं, पैसा फूंकते हैं, उसकी वजह से हम सांस नहीं ले पाते।’ उन्होंने कहा कि ‘हम लोग अन्य चीजों पर दोष डालते हैं। कोई अपने खेतों को जला रहा है…गाड़ियों की मुसीबत है, लेकिन ये सब झूठ है। अगर ये सच होता तो दिवाली के तीन दिन पहले तक सब ठीक होता है, उसके बाद न्यू ईयर तक और उसके बाद हम जी नहीं पाते, इसकी केवल एक वजह है।’

    ‘दिल्ली में जले 800 करोड़ के पटाखे’

    उन्होंने दावा किया है कि सिर्फ दिल्ली में ही दिवाली के दिन 800 करोड़ रुपये के पटाखे जला दिए जाते हैं। उनके मुताबिक ‘अगर केवल दिल्ली शहर में दिवाली में 800 करोड़ के पटाके उड़ेंगे तो नतीजा क्या होगा…हम लोग डिप्रेशन में हैं। जब तक बारिश नहीं आएगी, तबतक ये हवा कहीं जाएगी भी तो नहीं। बारिश भी आएगी तो क्या होगा, वे सारे केमिकल जमीन में चले जाएंगे, जमीन जहरीली हो जाएगी।’

    ‘या तो कहो कि सब लोग मर जाए’

    मेनका ने इस पूरी समस्या के लिए सुप्रीम कोर्ट को दोष देने से भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई है। उनका कहना है, ‘इसमें मजे की बात क्या है, ये सुप्रीम कोर्ट की पूरी गलती है। सुप्रीम कोर्ट ने फिर एक गलत ऑर्डर दिया, अब एक आदत सी उनकी बन गई है मनमाने ऑर्डर देना, बिना साइंटिफिक रिजनिंग..उन्होंने कह दिया ग्रीन पटाखे उड़ाओ। ग्रीन पटाखे का मतलब क्या है, कौन है नीले, ब्लू, येलो पीले पटाखे…जो भी कंबस्ट होता है, वह पटाखा होता है और इसके लिए केमिकल्स की जरूरत है। ग्रीन पटाखे के नाम की कोई भी चीज दुनिया में नहीं है। इससे अच्छा या तो बैन करो, या तो कहो कि सब लोग मर जाए…और खत्म करो और फिर हाय-हाय करते रहो।’

    ‘वो भी मालूम नहीं कि जल रहा था’

    मेनका गांधी एक और भड़काऊ टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, ‘ये बताइए कि राम-सीता के वक्त पटाखे होते थे? जब वे आए तो केवल दीए ही जल रहे थे ना? वो भी मालूम नहीं कि जल भी रहा था, तेल था या नहीं था! लेकिन, पटाखे तो नहीं थे।’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि ‘अजीब बात ये है कि जो लोग सबसे ज्यादा पटाखे जलाते हैं, वही सबसे ज्यादा चिल्लाते हैं कि सरकार क्या कर रही है। इतना प्रदूषण है, लेकिन प्रदूषण तो उन्होंने ही किया है।’

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