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  • पड़ोसी को बिजली बेच कर सकते हैं कमाई, दिल्ली में शुरू होगी व्यवस्था, मोबाइल ऐप से तय होंगे दाम

    नई दिल्ली: दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) ने दिल्ली के बिजली वितरण कंपनियों के लिए जो वर्चुअल नेट मीटरिंग की नई गाइडलाइंस जारी की है, उसके तहत उपभोक्ता आपस में ही बिजली खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। तीनों बिजली वितरण कंपनियां (बीएसईएस, टाटा पावर डीडीएल और एनडीएमसी) को अपने क्षेत्र में ऐसे 1000-1000 कंस्यूमर्स तैयार करने


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    By Azad Hind Desk फरवरी 16, 2026
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    नई दिल्ली: दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) ने दिल्ली के बिजली वितरण कंपनियों के लिए जो वर्चुअल नेट मीटरिंग की नई गाइडलाइंस जारी की है, उसके तहत उपभोक्ता आपस में ही बिजली खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। तीनों बिजली वितरण कंपनियां (बीएसईएस, टाटा पावर डीडीएल और एनडीएमसी) को अपने क्षेत्र में ऐसे 1000-1000 कंस्यूमर्स तैयार करने हैं।

    बिजली वितरण कंपनियों के अनुसार, डीईआरसी ने वर्चुअल नेट मीटरिंग की जो नई गाइडलाइंस जारी की है, उसके अनुसार नेट मीटरिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें आपके घर या बिल्डिंग की छत पर सोलर पैनल लगा है, तो आप अपनी जरूरत से अधिक बनी बिजली को बिजली वितरण कंपनी को वापस भेज सकते हैं। जब आप ग्रिड से बिजली लेते हैं, तो मीटर उसे रिकॉर्ड करता है। जब कोई अतिरिक्त सोलर बिजली ग्रिड में भेजता हैं, तो वह भी रिकॉर्ड होती है। महीने के अंत में दोनों का अंतर (नेट) निकालकर बिल बनाया जाता है।

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    क्या होगा फायदा?

    अगर आपने ज्यादा बिजली भेजी है, तो उसका क्रेडिट आपके बिल में अडजस्ट हो जाता है। वर्चुअल नेट मीटरिंग इससे थोड़ी अलग व्यवस्था है, जिसमें एक ही स्थान पर बनी सोलर बिजली को कई उपभोक्ताओं के बीच उनके स्वीकृत लोड के अनुसार बांटा जा सकता है, भले ही वे अलग-अलग मीटर क्यों न रखते हों। उदाहरण के तौर पर एक बिल्डिंग में 20 लोग रहते हैं, तो वे मिलकर एक कॉमन सोलर प्लांट बिल्डिंग से दूर कहीं भी जमीन लेकर लगा सकते हैं।

    डीईआरसी के नई गाइडलाइंस के अनुसार, उपभोक्ता आपस में सीधे बिजली खरीद-फरोख्त कर सकते हैं, जिसे पीयर-टू-पीयर ऊर्जा व्यापार का नाम दिया गया है। जो बिजली खरीदेगा उसे स्मार्ट मीटर लगाना होगा। बिक्री करने वाले उपभोक्ता के पास रूफटॉप सोलर प्लांट और नेट मीटरिंग की सुविधा होनी जरूरी है। दोनों पक्ष मोबाइल ऐप के जरिए बिजली की दरें तय कर सकते हैं। लेनदेन की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और सुरक्षित रखी गई है।

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    आखिर क्यों जरूरी था वर्चुअल नेट मीटरिंग?

    वर्चुअल नेट मीटरिंग को काफी आसान बनाया गया है, ताकि सभी तरह के उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिल सके। इसलिए वर्चुअल नेट मीटरिंग
    सिंगल पॉइंट कंस्यूमर तक पहुंचाया गया है। सोलर बिजली बनाने वाले उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी कमा सकते है। खरीदारों को डिस्कॉम की तय बिजली दरों की तुलना में कम दरों पर बिजली मिल सकती है। बिजली खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया को सरकार ने पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल बनाया है।

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