यूरोपीय संघ की एक सैन्य टुकड़ी, जिसमें सैन्य स्टाफ का झंडा और समूह के नौसैनिक अभियान, ऑपरेशन अटलांटा और एस्पाइड्स के झंडे भी थे, परेड में शामिल थे। यूरोप के बाहर इस तरह के आयोजन में यूरोपीय संघ की यह पहली भागीदारी थी। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने एक खास कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।
इन तीन खास वजहों से यूरोपीय यूनियन के सिपाहियों की टुकड़ी परेड में शामिल हुई
- सुरक्षा सहयोग: यह टुकड़ी अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और रक्षा मामलों में भारत-EU के बीच हो रहे सहयोग के विस्तार का प्रतिनिधित्व करती है।
- नई परंपरा: यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत गणतंत्र दिवस पर मित्र देशों के सैनिकों को शामिल किया जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय आयाम: इस उपस्थिति का उद्देश्य भारत के गणतंत्र दिवस परेड को एक वैश्विक मंच के रूप में प्रदर्शित करना था।
पीएम मोदी बोले- ईयू नेताओं की उपस्थिति दोनों पक्ष के बीच मजबूत संबंध के गवाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं की उपस्थिति भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की बढ़ती ताकत और साझा मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मेजबानी करना भारत के लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि उनकी उपस्थिति भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की बढ़ती ताकत और साझा मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ के नेताओं की यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में भारत और यूरोप के बीच जुड़ाव गहरा करेगी और सहयोग को गति प्रदान करेगी।














