500 KM दूर दुश्मन ठिकानों को ध्वस्त करने में सक्षम
न्यूज एजेंसी एएनआई ने रक्षा अफसरों के हवाले से बताया कि शक्तिबाण रेजिमेंट इंडियन आर्मी की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी का हिस्सा होंगी। शुरुआती यूनिट्स पहले ही काम करना शुरू कर चुकी हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बड़ी फोर्स रीस्ट्रक्चरिंग, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए सेना में बदलाव का प्लान बनाया था। शक्तिबाण रेजिमेंट उसी प्लान का हिस्सा है। इन शक्तिबाण रेजिमेंट्स के गठन से 5 से 500 किलोमीटर तक के लक्ष्य पर अटैक करने की सेना की क्षमता में मौजूद कमी को पूरा किया जा सकेगा।
ड्रोन के लिए सेना जल्द फास्ट ट्रैक प्रक्रिया शुरू करेगी
सैन्य अफसरों ने बताया कि 400-500 किमी से ज्यादा के टारगेट के लिए भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें हैं और अब उसे 120 किमी रेंज के पिनाका रॉकेट भी मिल रहे हैं। शक्तिबाण रेजिमेंट की पहली यूनिट को लैस करने के लिए भारतीय सेना जल्द ही एक फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत 850 लॉइटरिंग म्यूनिशन, साथ ही जरूरी लॉन्चर खरीदने के लिए टेंडर जारी करेगी।
इन प्राइवेट कंपनियों को मिल सकती है दावेदारी
भारतीय इंडस्ट्री फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के माध्यम से ड्रोन देगी और उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में उन्हें सेना को डिलीवर कर देगी। माना जा रहा है कि सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस, अडानी डिफेंस और रैफेएम जैसी भारतीय कंपनियां इस 2,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए दावेदार हो सकती हैं।
सेना ने ड्रोन ऑपरेटर्स का एक पूल बनाया
भारतीय सेना ने पहले ही एक लाख से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटर्स का एक पूल बना लिया है और अब फॉर्मेशन को जरूरी हथियार देना शुरू कर दिया है। शक्तिबाण रेजिमेंट के साथ, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी भी आर्टिलरी डिवीजनों के हिस्से के रूप में लगभग 35-40 दिव्यास्त्र बैटरी बनाएगी, जो अलग-अलग तरह के ड्रोन से लैस होंगी जिनमें घातक हमला करने की क्षमता होगी। इन्फैंट्री भी हर इन्फैंट्री बटालियन में अश्विनी प्लाटून बनाकर नई युद्ध की जरूरतों के हिसाब से खुद को आधुनिक बना रही है। इसमें एक नई स्पेशल फोर्स, भैरव का गठन भी हुआ है, जो कोर हेडक्वार्टर लेवल पर सेना की स्पेशल ऑपरेशंस क्षमता प्रदान करेगी, जिसमें हर ऑपरेटर दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए ड्रोन लॉन्च करने में सक्षम होगा।














