भारत ने मक्का और सोयाबीन पर अपनी सुरक्षा बनाए रखी है। ये दोनों ही फसलें अमेरिका में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) यानी आनुवंशिक रूप से संशोधित होती हैं। लेकिन, भारत ने पशुओं के चारे के लिए सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs) और लाल ज्वार ( red sorghum ) के आयात पर सहमति जताई है। इसके अलावा मेवे (tree nuts), ताजे व प्रोसेस्ड फल और सोयाबीन तेल का भी आयात होगा।
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क्या है किसानों की चिंता?
पशुओं के चारे के आयात को मंजूरी मिलने से किसान संगठनों में बेचैनी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक किसानों के संगठनों का कहना है कि DDGs, जो मक्के से बनता है, वह भी जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) होता है। उन्होंने सोयाबीन तेल के आयात पर भी सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े भारतीय किसान संघ (BKS) ने भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया है कि हमारी सभी फसलें सुरक्षित हैं।
क्या है सरकार और किसानों का तर्क?
| सरकार | किसान संगठन |
| सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs) और लाल ज्वार का आयात पशुधन क्षेत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। प्रोसेसिंग के बाद GM के सभी निशान मिट जाते हैं। यह आयात देश के पशुधन को बेहतर और सस्ता चारा उपलब्ध कराने के लिए है, जिससे दूध और मांस जैसे उत्पादों की लागत कम हो सकती है। | किसान संगठनों का कहना है कि DDGs मुख्य रूप से जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) अमेरिकी मक्के से आएंगे। इनकी गुणवत्ता सही नहीं होगी। साथ ही सोयाबीन तेल का भी आयात होगा। इससे किसानों की इनकम प्रभावित होगी। किसान संगठन सरकार से और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। |
DDGs पर रार क्यों?
भारत में DDGs मक्के और चावल से एक उप-उत्पाद (byproduct) के रूप में निकाले जाते हैं। इनकी गुणवत्ता ब्रॉयलर मुर्गियों और डेयरी गायों के चारे के लिए उपयुक्त नहीं होती है। अमेरिका में मक्के से इथेनॉल प्रोडक्शन के उप-उत्पाद (byproduct) के रूप में बनने वाले DDGs की गुणवत्ता बेहतर और कीमत भी कम होती है।
सोयाबीन तेल पर सवाल क्यों?
- किसान समूहों ने सोयाबीन तेल के आयात पर भी सवाल उठाए।
- उनका कहना है कि अमेरिका ट्रांसजेनिक किस्मों का सोयाबीन पैदा करता है।
- किसान समूहों का मानना है कि सोयाबीन तेल के आयात से लाखों सोयाबीन किसानों पर बुरा असर पड़ेगा।
इनकम पर भी असर
किसान संगठनों ने यह भी कहा कि DDGs और लाल ज्वार के आयात से लाखों किसानों की आय प्रभावित होगी, जो जानवरों और मुर्गीपालन के लिए चारा और दाना उगाने वाली फसलें उगाते हैं। वहीं सोयाबीन तेल के आयात से भी आर्थिक नुकसान होगा। BKS के अखिल भारतीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि सरकार को इस पर अपनी स्थिति और स्पष्टता से पेश करनी चाहिए।













