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  • पहले कनाडा, अब ब्रिटेन: चीन दौरे पर रवाना हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री, ट्रंप का चिढ़ना तय

    लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर चीन के साथ संबंधों में नरमी लाने के प्रयास के तहत ऐसे समय बीजिंग की यात्रा पर जा रहे हैं, जब अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्टार्मर को उम्मीद है कि इस दौरे से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, हालांकि इस कदम को लेकर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 27, 2026
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    लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर चीन के साथ संबंधों में नरमी लाने के प्रयास के तहत ऐसे समय बीजिंग की यात्रा पर जा रहे हैं, जब अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्टार्मर को उम्मीद है कि इस दौरे से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, हालांकि इस कदम को लेकर उन्हें देश में चीन के प्रति सख्त रुख रखने वालों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की असहमति का जोखिम भी है, जो पहले ही कई देशों पर टैरिफ लगा चुके हैं। उनकी यह यात्रा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के चीन दौरे के बाद हो रही है, जिस पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

    जिनपिंग से मिलेंगे ब्रिटिश पीएम

    स्टार्मर बुधवार से शुरू हो रही बीजिंग और शंघाई की इस यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात करेंगे। यह 2018 के बाद किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की चीन की पहली यात्रा होगी। उनके साथ ब्रिटेन के व्यापार मंत्री पीटर काइल और कई कॉरपोरेट प्रमुखों के जाने की संभावना है।ब्रिटेन इस दौरे के जरिए चीनी प्रौद्योगिकी और निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल और स्कॉच व्हिस्की के लिए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक बेहतर पहुंच चाहता है।

    वैश्विक बाजार बना चीन

    शंघाई स्थित फुडान विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के प्रोफेसर झाओ मिंगहाओ ने कहा, “चीन अब केवल दुनिया का कारखाना नहीं रहा, बल्कि वह एक वैश्विक बाजार के रूप में भी उभर रहा है।” दोनों पक्षों द्वारा जिस प्रमुख शब्द पर जोर दिया गया है, वह है “व्यावहारिक”। ट्रंप द्वारा विश्व व्यवस्था में उथल-पुथल मचाने के कारण, लंदन और बीजिंग दोनों ही अधिक स्थिर संबंध तलाश रहे हैं।

    चीन ने ब्रिटिश पीएम के दौरे पर क्या कहा

    चीन सरकार ने कहा कि वह इस यात्रा को राजनीतिक विश्वास बढ़ाने और “व्यावहारिक सहयोग” को गहरा करने के अवसर के रूप में देखती है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को बीजिंग में दैनिक मीडिया संवाद में कहा, “वर्तमान जटिल और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय स्थिति में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में चीन और ब्रिटेन दोनों देशों के लोगों के लिए संचार बनाए रखना तथा सहयोग को मजबूत करना साझा हित में है।”

    ब्रिटेन-चीन संबंधों में आएगी मजबूती

    किंग्स कॉलेज लंदन के लॉउ चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक केरी ब्राउन ने कहा कि स्टार्मर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भू-राजनीति में बड़े बदलाव ब्रिटेन-चीन संबंधों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा “स्टार्मर बेहद संदेहपूर्ण माहौल में बातचीत करेंगे।” ब्राउन के अनुसार, “चीन के साथ ब्रिटेन के संबंध कभी सामान्य नहीं रहे। इसमें निरंतरता की कमी रही है।”

    ब्रिटेन और चीन के रिश्तों में खटास

    ब्रिटेन और चीन के रिश्तों में 2015 में तत्कालीन कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री डेविड कैमरन द्वारा घोषित अल्पकालिक “स्वर्ण युग” के बाद से खटास आई है। इसके बाद हांगकांग में नागरिक स्वतंत्रता पर चीन की सख्ती, यूक्रेन युद्ध में रूस के प्रति बीजिंग के समर्थन तथा जासूसी और आर्थिक हस्तक्षेप को लेकर बढ़ती चिंताओं ने दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ा दी। कैमरन के बाद आए कंज़र्वेटिव प्रधानमंत्रियों ने संवेदनशील दूरसंचार ढांचे में चीनी निवेश पर रोक लगाई और नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में चीन की भागीदारी सीमित कर दी।

    लेबर पार्टी की सरकार ने चीन पर नीति बदली

    स्टार्मर की मध्यमार्गी वामपंथी लेबर पार्टी सरकार ने सत्ता में आने के 18 महीने बाद बीजिंग के साथ संबंधों की समीक्षा की। सरकार का कहना है कि उसकी नीति व्यावहारिक यथार्थवाद पर आधारित है, जिसके तहत चीनी जासूसी और हस्तक्षेप से राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हुए कूटनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग बनाए रखा जाएगा।

    ट्रंप की नीतियों से नाराज है ब्रिटेन

    स्टार्मर की यात्रा ऐसे दौर में हो रही है जब ट्रंप के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने के उनके प्रयास बहुत सफल होते नहीं दिख रहे हैं। हालांकि इन प्रयासों का फल एक व्यापार समझौते के रूप में मिला जिसमें ब्रिटेन के प्रमुख ऑटो और ऐरोस्पेस उद्योगों पर अमेरिकी शुल्क को कम कर दिया गया। स्टार्मर महीनों तक ट्रंप की सार्वजनिक रूप से आलोचना से बचते रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में, स्टार्मर ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की ट्रंप की इच्छा के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने इसे “पूरी तरह से गलत” बताते हुए और अफगानिस्तान में ब्रिटेन और अन्य नाटो सैनिकों की भूमिका के बारे में ट्रंप की अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा की है।

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