भारत-कनाडा में बढ़ रही नजदीकी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल फरवरी में कनाडा की यात्रा पर जा सकते हैं। दरअसल, भारत और कनाडा ने कार्नी के सत्ता में आने के बाद से इंटेलिजेंस और सुरक्षा सहयोग पर काफी जोर दिया है और डोभाल की इस यात्रा को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सोमवार को ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद के साथ भी बातचीत की है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
डोभाल और ड्रोइन में पहले भी हुई बात
मार्क कार्नी के कार्यकाल से पहले दोनों देशों के बीच संबंधों में इतनी कड़वाहट आ गई थी कि उच्चायोग भी बंद पड़ गए थे,जो 2025 के अगस्त से फिर से काम कर रहे हैं। पिछले साल सितंबर में कनाडा की सुरक्षा और खुफिया सलाहकार नथाली ड्रोइन दिल्ली आई थीं और उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल से सुरक्षा संबंधों को लेकर विस्तृत चर्चा की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह चर्चा मुख्य तौर पर उस द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने पर केंद्रित रही, जो 2023 में कनाडा में अलगाववादी खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की वजह से बिगड़ गई थी।
काउंटर-टेररिज्म पर दोनों आए हैं साथ
इस चर्चा में दोनों देश इस बात पर सहमत थे कि आपसी विश्वास बाहल करने और सहयोग बढ़ाने पर काम होगा। तब डोभाल और ड्रोइन के बीच काउंटर-टेररिज्म और संगठित अपराध के खिलाफ इंटेलिजेंस साझा करने में सहयोग पर जोर दिया गया। दोनों देश आपसी चिंता के क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर भी बात की थी। ऐसे में पहले डोभाल का कनाडा जाना और फिर कार्नी के भारत आने की अहमियत समझी जा सकती है, जिसमें काउंटर-टेररिज्म और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान बड़ा एजेंडा हो सकता है।
कार्नी के सत्ता में आने से बदला माहौल
इससे पहले कनाडा भारत-विरोधी ताकतों का पनाहगार बनने लगा था। वहां खालिस्तानी विचारधारा आक्रामक रूप ले रही थी। यही नहीं, संगठित अपराध के लिए भी कनाडा भारत के लिए सिरदर्दी बन गया था। इन्हीं वजहों से भारत और कनाडा में संबंध निचले स्तर पर आ गए थे। खासकर जब निज्जर हत्याकांड में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडु ने भारत पर आशंका जता दी,तो दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध बहुत ही ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। लेकिन, पिछले साल अप्रैल में मार्क कार्नी की चुनावी जीत ने संबंधों की दिशा बेहतर की ओर बदल दी। जून, 2025 में कार्नी और पीएम मोदी की जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई और इसके बाद ही सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चाएं आरंभ हुईं।













