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  • पाकिस्‍तानी आर्मी को ‘अल्लाह की फौज’ में बदल रहे असीम मुनीर, तानाशाह जिया के सपने को बनाएंगे हकीकत!

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने एक बार फिर अपने मजहबी रुख से ध्यान खींचा है। मुनीर ने सोमवार को लाहौर में एक कार्यक्रम में कहा है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना मुल्क है और अब अपने असली मकसद की तरफ जा रहा है। मुनीर ने बीते साल से कई बार


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    By Azad Hind Desk जनवरी 20, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने एक बार फिर अपने मजहबी रुख से ध्यान खींचा है। मुनीर ने सोमवार को लाहौर में एक कार्यक्रम में कहा है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना मुल्क है और अब अपने असली मकसद की तरफ जा रहा है। मुनीर ने बीते साल से कई बार ऐसे बयान दिए हैं, जिनमें उनकी दक्षिणपंथी विचारधारा का असर साफ दिखता है। मुनीर की विचारधारा का असर पाकिस्तानी की आर्मी पर भी दिख रहा है। मुनीर के समय में पाकिस्तानी सेना एक मजहबी फौज में तब्दील होती जा रही है। पाकिस्तानी सेना के इस्लामीकरण का सपना 80 के दशक में पूर्व सैन्य तानाशाह जिया उल हक ने देखा था। उस सपने को अब मुनीर पूरा करते दिख रहे हैं।

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, असीम मुनीर का पाकिस्तानी फौज पर एक अहम असर ये हो रहा है कि सैन्य प्रवक्ता विद्रोही गुटों के लिए फितना अल ख्वारिज और फितना अल हिंदुस्तान का इस्तेमाल कर रहा है। फितना और ख्वारिज जैसे शब्द सातवीं शताब्दी के अरब में चर्चा में आए थे। इनका अर्थ समाज में अशांति फैलाने वाले बुरे तत्वों से है। पाकिस्तानी सेना ने इन शब्दों को अपनाकर खुद को पैगंबर और खलीफाओं के समय के अरब से जोड़ने की कोशिश की है।

    जिया के सपने को सच करते मुनीर

    पाकिस्तान की सेना को अंग्रेजी कल्चर से निकालकर ‘इस्लामियत’ की तरफ मोड़ने पर सबसे ज्यादा काम जिया उल हक के समय हुआ। जिया उल हक ने सेना प्रमुख रहते हुए जुल्फिकार भुट्टो का तख्तापलट कर 1977 में सत्ता पर कब्जा किया था। इसके बाद जिया ने ही पाकिस्तानी समाज और सेना का इस्लामीकरण शुरू किया। इस मामले में उनके बाद मुनीर ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है।

    मुनीर के पाकिस्तानी सेना की कमान संभालने के बाद से एक्सपर्ट ने लगातार उनमें जिया की छवि देखी है। वह जिया के समय शुरू हुए सेना के इस्लामीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं। असीम मुनीर सार्वजनिक कार्यक्रमों अक्सर पाकिस्तानी सेना को अल्लाह की मदद जैसे बातें करते हुए और आयतें पढ़ते देखे जाते हैं। वह टू-नेशन थ्योरी और हिन्दू और मुसलमान के अलग कौम होने पर बयानबाजी करते रहे हैं।

    मुनीर ही जिया के वारिस

    कराची के जाने-माने वकील मखदूम अली खान कहते हैं, ‘जनरल जिया उल हक ने जो सपना देखा और जनरल परवेज मुशर्रफ जिसे हासिल नहीं कर पाए, अब वह सच होता लगता है। मुनीर ही इस समय भुट्टो का तख्तापलट कर कट्टर इस्लामी राज्य की नींव रखने वाले जिया के सही वारिस लगते हैं। मुनीर शायद जिया के बड़े सपने को पूरा कर देंगे।’

    खान कहते हैं कि दशकों तक पाकिस्तानी फौज के सीनियर अफसरों की पहचान सैंडहर्स्ट-ट्रेनिंग वाले, पश्चिमी संगीत पसंद करने वाले और व्हिस्की पीने वालों की रही है। सीनियर अफसर पेशेवर सैनिक की छवि पर जोर देते रहे हैं। दूसरी ओर आसिम मुनीर हाफिज-ए-कुरान हैं, जो शराब और संगीत से दूर रहते हैं और खुलकर धार्मिक बातें करते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना का इस्लामीकरण दुनिया और खासतौर से भारत के लिए चिंता पैदा करता है। यह इसलिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि असीम मुनीर ने अपनी ताकत को काफी ज्यादा बढ़ा लिया है। उनका आने वाले कुछ वर्षों तक पाकिस्तान पर प्रभाव रहने की उम्मीद है। यह उनको अपने सपने को पूरा करने का समय देगा।

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