बांग्लादेशी पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा है कि ISI का मकसद अवामी लीग को पूरी तरह से खत्म कर देना है। पाकिस्तान, अवामी लीग को अपना दुश्मन मानता है। वहीं, शेख हसीना के बेटे पर टिप्पणी करते हुए कॉलमिस्ट एम ए हुसैन ने एक आर्टिकल में कहा, “पॉलिटिकल इतिहास में एक बार-बार मिलने वाला सबक है, जिसे पार्टियां बहुत देर से सीखती हैं और देश इसकी भारी कीमत चुकाते हैं, खानदान संस्थाओं से ज्यादा तेजी से सड़ते हैं। जब पावर विरासत बन जाती है, तो फैसला खत्म हो जाता है। बांग्लादेश की अवामी लीग अब उस सबक को असल में जी रही है, जिसे बाहरी दुश्मनों ने नहीं बल्कि सजीब वाजेद जॉय की सोची-समझी लापरवाही ने आगे बढ़ाया है।”
ISI क्या अवामी लीग को जड़ से उखाड़कर फेंक सकती है
पाकिस्तान के मिलिट्री सिस्टम के अंदर शेख हसीना और उनकी अवामी लीग पार्टो की “गद्दार” माना जाता है, क्योंकि उन्होंने देश का विभाजन करवाया। इनमें से कम से कम दो ISI के लोग जमात-ए-इस्लामी की स्टूडेंट विंग के मेंबर थे। जॉय का भरोसा जीतने के लिए, इन ISI के लोगों ने सब कुछ किया, जिसमें उनके साथ सिर्फ बादशाह जैसा बर्ताव करना भी शामिल था। उन्होंने हसीना के बेटे के लिए भी कुछ बुरा किया और उन्हें ब्लैकमेलिंग के टूल के तौर पर बचाकर रखा। सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा है कि ISI के लोग हसीना के बेटे की कोर टीम में शामिल हो गये और उनसे कई ऐसे काम करवाए, जिसने पार्टी का खूब नुकसान करवाया।
जैसे पिछले साल अक्टूबर से ISI के लोगों की खास कोशिशों से शेख हसीना का “लिखा हुआ इंटरव्यू” इंटरनेशनल मीडिया में आने लगा, जिनमें से ज्यादातर जॉय के टॉप सहयोगी – मोहम्मद अली अराफात ने लिखे थे। इंटरनेशनल मीडिया को लगा कि उनके लिखे हुए सवालों के जवाब सच में शेख हसीना के हैं, लेकिन असल में वे अराफात की कलम से आ रहे थे, और ज़्यादातर मामलों में, हसीना को तब तक पूरी तरह अंधेरे में रखा गया, जब तक वे पब्लिश नहीं हो गए। इनमें से कुछ लिखे हुए इंटरव्यू, जो पश्चिम के जाने-माने मीडिया आउटलेट्स में छपे, उन्हें जॉय और उसके साथियों ने भारी कैश के बदले मैनेज किया था। इस साजिश के पीछे एक बार फिर शेख हसीना को इंटरनेशनल मीडिया के सामने अपनी राय रखने से रोकना और उन्हें सजीब वाजेद जॉय के भरोसेमंद पर पूरी तरह से निर्भर बनाना था।
अवामी लीग बांग्लादेश से क्या हो जाएगी खत्म
अवामी लीग के अंदर जो कुछ हुआ, वह अचानक हुई गिरावट का नतीजा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी अंदरूनी तोड़-फोड़ की कार्रवाई का नतीजा है। जिसमें खानदानी कमजोरी, राजनीतिक घमंड और जमीनी हकीकत से अलगाव का फायदा उठाया गया। सजीब वाजेद जॉय को सावधानी से लगाए गए लोगों से घेरकर, शेख हसीना को धीरे-धीरे चुप्पी, निर्भरता और राजनीतिक क्वारंटाइन में धकेल दिया गया।














