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  • पाकिस्तानी घुसपैठियों के लिए लगा दी फील्डिंग, भारत ने बना लिया ऐसा ‘उड़नछू’

    नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान-चीन जैसे पड़ोसियों के छल से निपटने के लिए बड़ी तैयारी कर ली है। उसने एक ऐसा तेजी से चार्ज करने वाला सिस्टम बनाया है, जो सीमा की निगरानी कर रहे या युद्धक ऑपरेशन में लगे ड्रोन को फौरन चार्ज कर देगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने यह कमाल


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    By Azad Hind Desk जनवरी 3, 2026
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    नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान-चीन जैसे पड़ोसियों के छल से निपटने के लिए बड़ी तैयारी कर ली है। उसने एक ऐसा तेजी से चार्ज करने वाला सिस्टम बनाया है, जो सीमा की निगरानी कर रहे या युद्धक ऑपरेशन में लगे ड्रोन को फौरन चार्ज कर देगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने यह कमाल किया है। अभी तक दूरदराज क्षेत्रों में तैनात ड्रोन लंबे समय तक टिक नहीं पाते थे, क्योंकि उनकी बैटरी खत्म होते ही वो एक्टिव नहीं रह पाते थे। इसे Surveillance Using Multilayer Intelligent Tracking, Response and Analysis (SUMITRA) नाम दिया गया है।

    घुसपैठियों को फौरन पकड़ लेगा ये सिस्टम

    DRDO ने मल्टीलेयर इंटेलिजेंट ट्रैकिंग, रिस्पांस एंड एनालिसिस (SUMITRA या सुमित्राा) नाम के एक परिधि निगरानी प्रणाली विकसित की है, जिसका उद्देश्य किसी भी रक्षा प्रतिष्ठान की सुरक्षा को बढ़ाना है। SUMITRA में हाई पेलोड मल्टी कॉप्टर (UAV) भी एकीकृत है, जो पाकिस्तान से आने वाले घुसपैठियों और आतंकियों का पता लगा सकता है, ताकि प्रतिष्ठान में मौजूद त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) मौके पर पहुंच सके।

    क्या है सुमित्रा की खासियत

    भारत का स्काईडॉक सुमित्रा को DRDO और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने मिलकर विकसित किया है। यह वायरलेस फास्ट चार्जिंग स्टेशन है, जो ड्रोन स्वार्म्स के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती और तत्काल लॉन्च की सुविधा देता है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ करने वाले आतंकी अब बच नहीं पाएंगे। यह पहाड़ों में उड़ने के लिहाज से डिजाइन किया गया है।

    झाड़ी या बंकर में भी छिप नहीं पाएंगे घुसपैठिये

    इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, सुमित्रा में कई सेंसर लगे हैं जो घुसपैठियों का पता लगाते हैं। सेंसर से प्राप्त डेटा नियंत्रण केंद्र को जाता है, जहां से यूएवी (इस मामले में एक हाई पेलोड मल्टी कॉप्टर) को घुसपैठियों का पता लगाने का संकेत मिलता है। अगर कोई घुसपैठिया झाड़ी या बंकर के पीछे भी छिप जाता है, तो ड्रोन उसके ऊपर मंडराएगा और क्यूआरटी (सुरक्षा बल) आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।

    सुरक्षाकर्मियों और घुसपैठियों में करेगा फर्क

    आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित होने की वजह से सुमित्रा हमारे गश्ती सुरक्षा कर्मियों और घुसपैठियों के बीच आसानी से अंतर कर सकता है। स्वदेशी रूप से विकसित प्रणाली होने के कारण, यह विदेशी समाधानों पर हमारी निर्भरता को समाप्त कर देगा, जिससे हमारे महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों की गोपनीयता सुनिश्चित होगी। सुमित्रा में हवाई खतरों की पहचान करने के लिए अंतर्निर्मित हवाई खतरा पहचान प्रणाली भी है।

    300 मीटर की ऊंचाई पर उड़ेगा

    सुमित्रा वर्तमान में चित्रदुर्ग स्थित वैमानिकी परीक्षण रेंज में स्थापित है। हाई पेलोड मल्टी कॉप्टर की भार वहन क्षमता बहुत अधिक है। यह भार ले जाकर निर्धारित स्थान पर छोड़ सकता है और वापस अपने मूल स्थान पर लौट सकता है। इसकी रेंज 5 किलोमीटर है और यह 300 मीटर की ऊंचाई पर उड़ सकता है। इसकी उड़ान अवधि 30 मिनट है।

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