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  • पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्‍वाजा आस‍िफ का बड़ा कबूलनामा, जनरल असीम मुनीर हैं देश के ‘असली’ शासक!

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कबूल किया है कि जनरल असीम मुनीर ही पाकिस्तान के ‘डी-फैक्टो’ शासक हैं। पाकिस्तान की सरकार को हमेशा से सैन्य अधिकारियों ने ही नियंत्रित किया है और ख्वाजा आसिफ ने इसपर मुहर लगा दी है। उनसे फ्रांस 24 के एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि क्या


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    By Azad Hind Desk फरवरी 20, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कबूल किया है कि जनरल असीम मुनीर ही पाकिस्तान के ‘डी-फैक्टो’ शासक हैं। पाकिस्तान की सरकार को हमेशा से सैन्य अधिकारियों ने ही नियंत्रित किया है और ख्वाजा आसिफ ने इसपर मुहर लगा दी है। उनसे फ्रांस 24 के एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि क्या फील्ड मार्शल मुनीर ही पाकिस्तान के असल शासक हैं? इसपर उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि सरकारें, एस्टैब्लिशमेंट द्वारा कंट्रोल की जाती हैं। हमारी सेना सबसे जरूरी संस्था है। भारत और अफगानिस्तान से खतरे के कारण, वे चुनी हुई सरकार की मदद कर रहे हैं।”

    ख्वाजा आसिफ का ये कबूलनामा इसलिए भी अहम है क्योंकि शहबाज शरीफ की सरकार ने असीम मुनीर को आर्मी चीफ से फील्ड मार्शल बना दिया है। इसके अलावा उन्हें पाकिस्तान का चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस यानि CDF भी बना दिया है। जिसका मतलब है कि जनरल असीम मुनीर से ज्यादा शक्तिशाली पूरे पाकिस्तान में अब कोई नहीं है। जनरल मुनीर जब तक चाहें, वो सेना का प्रमुख बने रह सकते हैं। शहबाज शरीफ की जगह असीम मुनीर ही अलग अलग देशों की यात्राएं करते हैं, वहां के नेताओं से मिलते हैं और पाकिस्तान की विदेश नीति तय करते हैं।

    ‘अमेरिका ने टॉयलेट पेपर की तरह किया इस्तेमाल’
    इसके अलावा पिछले हफ्ते देश की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल एक टॉयलेट पेपर की तरह किया।’ उन्होंने अपने देश में आतंकवाद को “पुरानी गलतियों” का नतीजा बताते हुए अमेरिका पर आरोप लगाया था कि “वह इस्लामाबाद का स्ट्रेटेजिक तरीके से इस्तेमाल कर रहा है और फिर उसके साथ टॉयलेट पेपर से भी बदतर व्यवहार करता है।” अमेरिका की पूर्व विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन के एक भाषण का जिक्र करते हुए ख्वाजा आसिफ ने देश की संसद में कहा था कि ‘वह भाषण’ इस बात का साफ-साफ कबूलनामा था कि अमेरिका ने हमारा कैसे इस्तेमाल किया।

    ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि “और फिर उन्होंने हमें टिशू पेपर की तरह, या ज्यादा सही कहें तो टॉयलेट पेपर के टुकड़े की तरह फेंक दिया।” उन्होंने 1999 के बाद वॉशिंगटन के साथ पाकिस्तान के फिर से जुड़ने और उसके बाद दो अफ़गान युद्धों में शामिल होने को “सबसे बड़ी गलतियां” बताया। आसिफ ने आगे कहा कि आज पाकिस्तान जिस आतंकवाद से जूझ रहा है, वह अमेरिका की तरफ से अफगान युद्धों में दखल देने का नतीजा था। आसिफ ने पाकिस्तानी संसद में कहा था कि “हम अफगान जमीन पर लड़े गए दो युद्धों में शामिल हुए। हमने इस्लाम के प्यार के लिए दोनों युद्धों में हिस्सा नहीं लिया। तानाशाहों को वैधता और एक सुपरपावर के साथ रिश्ते चाहिए थे। हमें एक बात बिल्कुल साफ होनी चाहिए, यह जिहाद नहीं था।”

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