तुर्की के अलावा कतर और सऊदी अरब के कई प्रयास के बाद भी तालिबान और पाकिस्तान के बीच सहमति नहीं बन पाई है। पाकिस्तान की हरकतों से तालिबानी सरकार काफी नाराज है जिससे तनाव काफी बढ़ा हुआ है। अफगानिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान की सीमा पर शांति के लिए थोपी गईं ‘अवैध’ शर्तों को खारिज कर दिया है। तुर्की के अधिकारियों ने पाकिस्तान को यह साफ बता दिया है कि अफगानिस्तान की सरकार पाकिस्तान की टीटीपी को लेकर की गई सुरक्षा की मांग को खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान और तालिबान में टीटीपी पर तनाव
सीएनएन न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के सख्त रुख के बाद तुर्की को मध्यस्थता के अपने कदम को पीछे खींचने पड़े हैं। पाकिस्तान और तालिबान के बीच सबसे ज्यादा विवाद तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी आतंकियों को लेकर है। टीटीपी के आतंकी पाकिस्तानी सेना का काल बन गए हैं। वे लगातार हमले करके पाकिस्तानी सैनिकों को मार रहे हैं। पाकिस्तान तालिबान से मांग कर रहा है कि वह टीटीपी के आतंकियों को उसे सौंप दे। यही नहीं पाकिस्तान यह भी मांग कर रहा है कि तालिबान डूरंड लाइन पर 5 किमी तक बफर जोन बनाए, सामानों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखे, अफगान शरणार्थियों को वापस ले।
अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने पाकिस्तान की इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा कि यह देश की संप्रभुता को कमजोर करेगा। तालिबानी सरकान ने तुर्की, कतर और सऊदी अरब तीनों को बता दिया है कि वह पाकिस्तान के दबाव की रणनीति को स्वीकार नहीं करेगा। तुर्की ने बार बार तालिबान की सरकार पर दबाव डाला कि पाकिस्तान को इस संबंध में लिखित गारंटी दे दे लेकिन अफगान सरकार ने झुकने से इंकार कर दिया। यही नहीं पाकिस्तान अब अपने दोस्त कतर पर इस असफलता का गुस्सा निकाल रहा है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि कतर तालिबान का पक्ष ले रहा है।
भारत की शरण में तालिबान की सरकार
अब पाकिस्तान को केवल एक देश सऊदी अरब से केवल उम्मीद बची है जो दोनों पड़ोसी देशों में शांति करा सकता है। इस बीच पाकिस्तान ने कहा है कि अगर उसके देश पर कोई बड़ा आतंकी हमला होता है तो इसे तालिबान की जिम्मेदारी माना जाएगा। पाकिस्तान ने कहा है कि वह अपने संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी तरीका अपनाएगा। इसमें अफगानिस्तान में हवाई हमला शामिल है। इस बीच तालिबान ने पाकिस्तान के दबाव से निपटने के लिए भारत के ईरान में बनाए चाबहार पोर्ट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है जिससे उसकी कराची पोर्ट से निर्भरता खत्म हो गई है। अफगान सरकार मध्य एशिया के देशों से भी रिश्ते बना रही है। तालिबान अब भारत से दवाएं मंगा रहा है। इससे पाकिस्तानी व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। भारत से दवाओं की खेप पहुंचना शुरू हो गई है।













