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  • पाकिस्तान की ‘पिटाई’ का मुरीद हुआ अमेरिका, चीन के दबदबे पर भारत का मजबूत साथ चाहते हैं यूएस-इंडो पैसिफिक चीफ

    नई दिल्ली: अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुएल जे पपारो ने पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की है। रविवार को भारत दौरे पाए एडमिरल पपारो ने भारत के सामरिक क्रियान्वयन की सराहना की है। उन्होंने कहा-भारत और अमेरिका दोनों को संघर्षों से सबक लेना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी एडमिरल


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    By Azad Hind Desk फरवरी 16, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुएल जे पपारो ने पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की है। रविवार को भारत दौरे पाए एडमिरल पपारो ने भारत के सामरिक क्रियान्वयन की सराहना की है। उन्होंने कहा-भारत और अमेरिका दोनों को संघर्षों से सबक लेना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी एडमिरल ने क्षेत्र में चाइनीज हथियारों की बढ़ती भूमिका पर चिंता भी जताई।

    पपारो ने हिंद-प्रशांत में बढ़ते दबदबे पर जताई चिंता

    एडमिरल सैमुएल जे पपारो ने कहा-अमेरिका-भारत रक्षा सहयोग में और तेजी लाने की वकालत भी की। उन्होंने चीन पर निशाना साधते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते दबदबे और आक्रामकता पर चिंता भी जताई।

    ऑपरेशन सिंदूर के सबक से सीखने की जरूरत

    टाइम्स ऑफ इंडिया के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पपारो ने कहा-सबसे पहले मैं उस भयावह घटना (पहलगाम आतंकी हमला) के प्रति बेहद सहानुभूति रखता हूं, जो इस संकट से पहले घटी थी। मैं ऑपरेशनों को लेकर टैक्टिकल ऑपरेशनों का समर्थन करता हूं। एडमिरल पपारो ने कहा-भारतीय सेना की ओर से इस संघर्ष से सबक सीखने की गहरी प्रतिबद्धता देखी है।

    लॉन्ग रेंज हथियारों में मारक क्षमताएं होती हैं

    एडमिरल पपारो से जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा चाइनीज हथियारों के इस्तेमाल पर पूछा गया तो उन्होंने कहा- जटिल लंबी दूरी के हथियारों में जटिल लंबी दूरी के किल चेन क्षमताएं होती है। इन हथियारों में सेंसर्स, संचार, प्रपल्शन, वॉरहेड्स लगे होते हैं। ऐसे में 21वीं सदी में भूगोल मायने नहीं रखता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चाइनीज हथियार भी फेल हो गए थे। पाकिस्तान में चीन के बने डिफेंस सिस्टम नाकाम हो गए थे। भारतीय सेना ने चाइनीज डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रक्षा हमारी सबसे बड़ी ड्यूटी

    क्षेत्र में चीन की सैन्य ताकत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में अमेरिकी ऑपरेशन पर एडमिरल पपारो ने कहा-रोकथाम हमारा सर्वोच्च कर्तव्य है। सबसे खराब स्थिति का आकलन करना और उसके लिए तैयार रहना मेरा काम है।
    भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इन चिंताओं से कुछ हद तक सहमत है, क्योंकि यह क्षेत्र विश्व की 60% आबादी, विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का 60% से अधिक और विश्व की सात सबसे बड़ी सेनाओं का घर है।

    दुनिया के दो लोकतंत्र में रिश्ते परस्पर संप्रभुता पर आधारित

    पपारो ने कहा-हम इन चिंताओं का समाधान बढ़ती साझेदारी के माध्यम से करते हैं…दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच पारस्परिक सम्मान और संप्रभुता पर आधारित संबंध हैं।
    उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और भारत दोनों संप्रभुता, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री स्वतंत्रता के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। एडमिरल पापरो ने कहा-हम हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा में भारत के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हैं।

    भारत-अमेरिका में हुए रक्षा समझौते का समर्थन

    आगामी मिलान अभ्यास को ध्यान में रखते हुए एडमिरल पपारो ने कहा-अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेठ और भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच कुआलालंपुर में हस्ताक्षरित हालिया रक्षा समझौते में भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और मजबूत होते देखना बेहद खुशी की बात है।
    अलास्का में युद्ध अभ्यास, मिलान, मालाबार सीरीज, COPE इंडिया अभ्यास और जन-संपर्क जैसे कई संयुक्त अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। हम इस रिश्ते को बहुत महत्व देते हैं। आधुनिक युद्ध रणनीतियों के बारे में एडमिरल ने कहा&तेजी से, 21वीं सदी में सूचना वातावरण, यानी अंतरिक्ष, प्रति-अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कम दृश्यता और अन्य प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने वाले कर्ताओं का वर्चस्व रहेगा।

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