सऊदी और यूएई में तनाव क्यों है
सऊदी और यूएई के संबंध बेहत तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों में तनाव तब बढ़ गया, जब सऊदी अरब ने UAE को यमन से अपने सैनिक हटाने का आदेश दिया। इसका मकसद यमन में अलगाववादियों को यूएई के समर्थन को खत्म करना था। 30 दिसंबर को, सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर बमबारी की, जिसमें UAE से आ रही हथियारों की एक कथित खेप को निशाना बनाया गया, जो अलगाववादी दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) समूह के लिए थी।
सऊदी ने यमन में हमले पर क्या कहा
सऊदी अरब ने इसे एक सीमित ऑपरेशन बताया। उसने हमले को यह कहकर सही ठहराया कि यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक “रेड लाइन” है। उसने यमन में हथियार भेजने के यूएई के फैसले की आलोचना की और उसे “बेहद खतरनाक” बताया। इसके बाद यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) ने अमीराती सेनाओं से यमन छोड़ने का आदेश दिया, UAE के साथ रक्षा समझौता रद्द कर दिया और बंदरगाहों और सीमाओं पर आपातकालीन प्रतिबंध लगा दिए।
सोमालिया ने भी यूएई को झटका दिया
इस हफ्ते, सोमालिया ने भी UAE के साथ सुरक्षा और बंदरगाह समझौतों को रद्द कर दिया है। सोमालिया ने आरोप लगाया है कि यूएई ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है, जिसने अपने क्षेत्र से STC नेता ऐदारूस अल-जुबैदी को निकाला था। सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सवाल हाल के हफ्तों में और भी जरूरी हो गए हैं, क्योंकि UAE और उसका क्षेत्रीय सहयोगी इजरायल सोमालीलैंड के करीब आ रहे हैं, जो सोमालिया का एक अलग हुआ क्षेत्र है जिसकी अपनी सरकार है।
सोमालीलैंड के करीब आया यूएई?
सऊदी अरब ने सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता के लिए समर्थन व्यक्त किया है और कई मुस्लिम-बहुल देशों के साथ मिलकर इजरायल के सोमालीलैंड को मान्यता देने और उस क्षेत्र की राजकीय यात्रा की निंदा की है। UAE ने भी सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि की है, लेकिन मोगादिशु को दरकिनार करते हुए सोमाली क्षेत्रों पुंटलैंड और सोमालीलैंड में स्थानीय प्रशासनों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं।
मिस्र बना सऊदी और यूएई में खलनायक
इस बीच, मिस्र और सऊदी अरब के बीच हाल ही में रिश्ते मजबूत हुए हैं। मिस्र के राष्ट्रपति के एक करीबी सूत्र के अनुसार, काहिरा ने ही यमन में अमीराती ऑपरेशन्स की इंटेलिजेंस सऊदी अधिकारियों को दी थी। सूत्र ने बताया, “सऊदी समर्थन को बहाल करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को बचाने के लिए मिस्र ने UAE को कुर्बान कर दिया।”













