पाकिस्तान से निर्भरता हटा रहा चीन
चीन और अफगानिस्तान में वाखान कॉरिडोर को लेकर बातचीत ऐसे वक्त हुई है, जब बीजिंग अपने फ्लैगशिप बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के सुरक्षा हालात का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। चीन को डर है कि पाकिस्तान में उसके सीपीईसी कॉरिडोर को लेकर किया गया निवेश खतरे में है। ऐसे में चीन पाकिस्तान से निर्भरता हटाकर अफगानिस्तान के साथ सीधा संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। चीन का आरोप है कि पाकिस्तान तेजी से बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति और अपने देश में मौजूद चीनी नागरिकों और संपत्तियों की सुरक्षा करने में विफल रहा है।
चीन को वाखान कॉरिडोर की जरूरत क्यों है?
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन, पाकिस्तान में लगतार बढ़ते आतंकी हमलों के कारण वैकल्पिक व्यापार मार्ग की तलाश कर रहा है। पहले भी ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं कि चीन सीपीईसी की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान से नाराज है। इस कारण चीन ने पाकिस्तान में सीपीईसी प्रोजेक्ट्स में निवेश को भी कम कर दिया है। ऐसे में चीन को वाखान कॉरिडोर के जरिए अफगानिस्तान से संपर्क का नया रास्ता दिख रहा है। तालिबान को भी चीन के निवेश की बहुत जरूरत है। इस कारण तालिबान भी ईस्ट तुर्कमेनिस्तान विद्रोही गुटों की आपत्तियों के बावजूद चीन से संपर्क बढ़ा रहा है।
वाखान कॉरिडोर क्या है?
वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान के बदाख्शान प्रांत में स्थित जमीन की एक पतली पट्टी है। यह गिलगित-बल्तिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से सटी हुआ है। इस कॉरिडोर का 75 किलोमीटर लंबी पूर्वी सीमा चीन के शिनजियांग प्रांत से सटी हुई है। यह ऐतिहासिक सिल्क रूट का हिस्सा भी रहा है जो अफगानिस्तान के माध्यम से चीन को मध्य एशिया, यूरोप और दक्षिण एशिया से जोड़ता था। वाखान कॉरिडोर लगभग 350 किलोमीटर लंबा और विभिन्न हिस्सों में 20 से 60 किलोमीटर चौड़ा है और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 10,300 वर्ग किलोमीटर है।













