अब्दुल अलीम खान का कहना है कि इस समुद्री रूट से पाकिस्तान स्ट्रेटेजिक ट्रांजिट हब बन जाएगा क्योंकि रीजनल सप्लाई चेन दूसरे कॉरिडोर की ओर बढ़ रही हैं। पाकिस्तान अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा लेते हुए जमीन से घिरी सेंट्रल एशियाई इकॉनमी को गर्म पानी वाले पोर्ट से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान ढूंढ रहा है मौका
सेंट्रल एशिया के देशों और रूस ने हाल के सालों में ऐसे रूट की तलाश की है, जो ट्रेडिशनल समुद्री चोकपॉइंट और लंबी शिपिंग लेन को बायपास करते हैं। पाकिस्तान की सरकार कराची और ग्वादर के अपने पोर्ट को साउथ एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरेशिया को जोड़ने वाले गेटवे के तौर पर पेश कर रहा है। पाकिस्तान चाहता है कि इन देशों की निर्भरता उस पर हो जाए।
अब्दुल अलीम ने बताया कि बेलारूस, रूस और सेंट्रल एशिया कॉरिडोर में पाकिस्तान का स्ट्रेटेजिक इंटीग्रेशन रीजनल कनेक्टिविटी की नई शुरुआत है। इन कोशिशों के तहत छह लैंड कॉरिडोर ट्रांजिट ट्रेड को आसान बना रहे हैं। इसमें तुर्की, अजरबैजान और ईरान के अलावा चीन-कजाकिस्तान कनेक्टिविटी और सेंट्रल एशियाई देशों को अरब सागर से जोड़ने वाले ट्रांस-अफगान लिंक शामिल हैं।
रूस-पाकिस्तान का रिश्ता
पाकिस्तान और रूस पारंपरिक सहयोगी नहीं रहे हैं। इसकी अहम वजह रूस के भारत से करीबी रिश्ते और पाकिस्तान का अमेरिकी कैंप का देश होना रहा है। हालांकि हालिया महीनों में यह स्थिति बदलती दिखी है। दोनों देश अपने रिश्ते को सुधार रहे हैं। खासतौर से व्यापार के क्षेत्र में पाकिस्तान ने रूस से संबंध सुधारने पर जोर दिया है।
पाकिस्तान के मिनिस्टर अब्दुल अलीम खान ने हाल ही में रूसी मंत्री दिमित्री स्टानिस्लावोविच जेवरेव से मुलाकात की थी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मॉस्को-इस्लामाबाद के लिए सीधी फ्लाइट बिना देर किए शुरू की जानी चाहिए। दोनों पक्षों में ट्रांसपोर्ट सेक्टर में सहयोग के लिए सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के विकास पर जोर दिया गया।













