पाकिस्तान चाहता है कि कतर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके तालिबान को रोके। पाकिस्तानी सेना को यह भी शक है कि कतर पर्दे के पीछे से टीटीपी का सपोर्ट कर रहा है। पाकिस्तानी सेना और नवाज शरीफ के करीबी नजम सेठी ने दावा किया है कि पाकिस्तान को शक है कि कतर टीटीपी को सपोर्ट कर रहा है। इसके पीछे उनकी दलील है कि कतर का अलजजीरा हमलावरों को ‘फाइटर’ लिख रहा है। उन्होंने कहा कि अलजजीरा पाकिस्तान के खिलाफ रिपोर्ट कर रहा है। कई अन्य पाकिस्तानी भी अलजजीरा का विरोध कर रहे हैं।
पाकिस्तान और कतर में क्यों चल रही है तल्खी?
पाकिस्तान और कतर दोनों ही इस्लामिक देश हैं और दोनों के बीच रिश्ता दशकों पुराना है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि जब से पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया है, तब से कतर और यूएई उससे दूरी बना रहे हैं। यही नहीं पाकिस्तान कतर से वादे के मुताबिक एलएनजी नहीं खरीद रहा है। इससे भी दोनों देशों के बीच रिश्ते में तल्खी देखी जा रही है। अब कतर के साथ रिश्ते को फिर से पटरी पर लाने और तालिबान के खिलाफ मदद मांगने के लिए शहबाज शरीफ दोहा पहुंचे हैं।
शहबाज शरीफ कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव, गाजा पीस प्लान, अमेरिका-ईरान तनाव समेत अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों में बात होगी। पिछले 5 महीने में यह शहबाज शरीफ की तीसरी कतर यात्रा है। इससे समझा जा सकता है कि पाकिस्तान कतर को लेकर कितना टेंशन में है। विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान में हवाई हमला करने के ठीक बाद शहबाज शरीफ को भागे-भागे कतर पहुंचने के पीछे तालिबान का पलटवार और टीटीपी बड़ा कारण है।
कतर से अब क्या चाहता है पाकिस्तान ?
एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक शहबाज शरीफ कतर के अमीर को अफगानिस्तान पर हवाई हमले के बारे में बताएंगे। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबानी सरकार अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी आतंकियों को सपोर्ट कर रही है। कतर में तालिबान का राजनीतिक कार्यालय है। इससे पहले कतर ने ही तालिबान और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कराई थी और सीजफायर हुआ था। अब पाकिस्तान चाहता है कि तालिबानी सेना पलटवार नहीं करे और कतर काबुल को हमला करने से रोके।














