रिपोर्ट में जैश और मसूद अजहर के इरादों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा गया है कि महिला विंग का मकसद आंतकी अभियानों को तेज करना है। यह जैश के संगठन में टैक्टिकल बदलाव का इशारा है। अभी तक यह गुट आतंकी हमलों के लिए पुरुषों पर निर्भर रहा है। जैश में महिलाओं की भागीदारी ने भारत के लिए चिंता बढ़ाई है।
जैश ने जारी किया है सर्कुलर
जैश के जमात अल-मुमिनात पर सर्कुलर में इसे धर्म से जोड़ा है। इसे ऐसे तैयार किया गया है, जिससे शहरी मुस्लिम महिलाओं को आकर्षित किया जा सके। CNN-News18 ने सिक्योरिटी एक्सपर्ट के हवाले से कहा है कि JeM का महिला विंग को बढ़ाना बड़े ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की तरह के सेल-बेस्ड वर्टिकल स्ट्रक्चर को दिखाता है।
जैश और दूसरे संगठनों से जुड़ीं महिला अभी तक रिक्रूटर, फंडरेजर, लॉजिस्टिक फैसिलिटेटर और मैसेज कूरियर का काम करती रही हैं। इस परंपरागत रोल के उलट जैश की महिला विंग सीधे आतंकी हमलों में शामिल होने का संकेत देती है। इस विंग की शुरुआत 2024 में हो गई थी लेकिन अक्टूबर, 2025 के बाद इसमें तेजी आई है।
जैश ने महिलाओं का रोल क्यों बढ़ाया
सुरक्षा अधिकारियों ने जमात अल-मुमिनात के मटीरियल और पाकिस्तान में मौजूद अल-मुहाजिरत और मरकज उस्मान-ओ-अली जैसी संस्थाओं से जुड़े पब्लिकेशन के स्टाइल में समानता देखी है। इनका पता बहावलपुर से चला है, जिसे लंबे समय से JeM का गढ़ माना जाता है। यह क्रॉस-बॉर्डर डिजाइन की ओर इशारा करते हैं।
अधिकारियों ने जमात अल-मुमिनात को महिलाओं के सिंबॉलिक फोरम से कहीं ज्यादा बताया है। यह एक साइकोलॉजिकल और जमीनी भर्ती फ्रंट के तौर पर काम कर रहा है। इसका मकसद जम्मू-कश्मीर और भारत के दूसरे हिस्सों में JeM का असर बढ़ाना है। यह निश्चित तौर पर भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
भारत के लिए कितनी चिंता
जैश की महिला विंग से जुड़ी रिपोर्ट भारत की सुरक्षा चिंता बढ़ाती है। जैश के मसूद अजहर का भारत में हमले कराने का पुराना इतिहास रहा है। मसूद अजहर को लंबे समय से सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है। माना जाता है कि मसूद लगातार आतंक फैलाने के काम में लगा है। महिला विंग बनाने से उसके इरादे और ज्यादा साफ हो जाते हैं।













