पाकिस्तान के जल मंत्रालय के सेक्रेटरी सैयद अली मुर्तजा ने गुरुवार को कहा, ‘भारत ने पाकिस्तान को लिखा कि IWT को रोक दिया गया है। इसके उलट पाकिस्तान का कहना है कि संधि चल रही है और पूरी तरह असरदार है। हमारे रुख का CoA ने भी समर्थन किया है। कोर्ट ने साफ कहा है संधि खत्म नहीं हुई और भारत पर लागू होती है। यह पाकिस्तान की एक बड़ी जीत है।’
भारत ने नहीं माना कोर्ट का दखल
पाकिस्तान की ओर से सिंधु जल संधि विवाद को हेग के परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) ले जाया गया है। वहीं भारत ने इस मामले में कोर्ट के दखल को खारिज किया है। भारत ने कहा है कि वह इस ट्रिब्यूनल को गैर-कानूनी मानता है। भारत ने इस ट्रिब्यूनल के सप्लीमेंट्री अवॉर्ड और ऑपरेशनल डाटा मांगने वाले समन को मानने से भी इनकार कर दिया।
पाकिस्तान की अर्जी पर सुनवाई करते हुए इस महीने की शुरुआत में कोर्ट ने भारत को समन भेजा था। समन में भारत से किशनगंगा और रातले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के ऑपरेशनल रिकॉर्ड और डाटा मांगा गया था। भारत ने इस मांग को खारिज करते हुए डाटा नहीं दिया। भारत सरकार ने ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को ही मानने से इनकार कर दिया।
पहलगाम हमले के बाद निलंबित हुई संधि
बीते साल अप्रैल में पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद भारत ने भारत ने पाकिस्तान के साथ IWT स्थगित करने का ऐलान किया था। 1960 की IWT संधि सिंधु छह नदियों के पानी का बंटवारा भारत और पाकिस्तान के बीच करती है। भारत के कदम से पाकिस्तान के सामने जल संकट पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है।
पाकिस्तान सरकार की ओर संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर दुनियाभर के मंचों पर सिंधु जल संधि (IWT) का मुद्दा उठाया गया है। पाकिस्तान ने दुनिया से इस मामले में दखल देने की अपील की है। पाकिस्तान ने इस मामले में भारत को भी युद्ध की गीदड़भभकी दी है। पाकिस्तान ने संधि तोड़ने को एक्ट ऑफ वॉर कहा है।













