समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ JF-17 खरीदने के लिए संभावित 4 अरब डॉलर के एक डील पर चर्चा की है। आपको बता दें कि JF-17 को पाकिस्तान ने चीन की मदद से बनाया है, जिसमें पाकिस्तान की 35 प्रतिशत और चीन की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसीलिए कुछ एक्सपर्ट्स ने इस डील की संभावनाओं पर सवाल खड़े किए हैं, खासकर उस वक्त, जब खुद सऊदी अरब, अमेरिका से F-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। पिछले साल के अंत में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अमेरिका भी गये थे और वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस दौरान एफ-35 को लेकर बातचीत की गई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि “कर्ज बदलने के अलावा” लड़ाकू विमान के उपकरणों पर अतिरिक्त 2 अरब डॉलर खर्च किए जा सकते हैं।
पाकिस्तान से JF-17 लड़ाकू विमान खरीदेगा सऊदी अरब?
आपको बता दें कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं। पाकिस्तान जब जब आर्थिक संकट में फंसता है, सऊदी अरब लोन देकर उसे दिवालिया होने से बचाता है। 2018 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का आपातकालीन लोन दिया था, जिसके तहत रियाद ने पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में 3 अरब डॉलर जमा किया था और 3 अरब डॉलर की तेल सप्लाई करने पर सहमति जताई थी। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले आठ सालों में, सऊदी अरब ने पाकिस्तान सेंट्रल बैंक में अपनी जमा राशि को कई बार रोल ओवर किया है, जिससे इस्लामाबाद दिवालिया होने से बचा है।
हालांकि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच होने वाली JF-17 डील को लेकर द विलसन सेंटर के पूर्व सीनियर फेलो और डॉन अखबार के इंटरनेशनल अफेयर्स जर्नलिस्ट बाकिर सज्जाद ने शक जताया है। उन्होंने अमेरिका स्थिति अल्बने यूनिवर्सिटी के प्रोफसर क्रिस्टोफर क्लेरी, जो एशिया मामलों के एक्सपर्ट हैं, उनके सऊदी पाकिस्तान के बीच JF-17 को लेकर चल रही बातचीत वाली ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बाकिर सज्जाद ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि “क्रिस, JF17 को लेकर चल रही बातचीत पर शक करने की कई वजहें हैं। सऊदी अरब, अमेरिका से F35 पर नजर गड़ाए हुए है, तो फिर हल्का चौथी जेनरेशन का प्लेन क्यों लेंगे? दूसरा, क्या रियाद चीनी टेक्नोलॉजी खरीदकर ट्रंप को नाराज करने का जोखिम उठाएगा? अगर वे विविधता ला रहे हैं, तो क्या वे पाकिस्तान-चीन के मिलकर बनाए गए प्लेन के बजाय, डायरेक्ट चीनी J-35/J-20 नहीं लेंगे? कुछ तो गड़बड़ है।”
कुल मिलाकर JF-17 पर बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश मिडिल ईस्ट में हो रहे जियोपॉलिटिकल बदलावों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। रॉयटर्स ने दिसंबर में रिपोर्ट किया था कि पाकिस्तान ने जनरल खलीफा हफ्तार की लीबियाई नेशनल आर्मी को 16 JF-17 लड़ाकू विमानों सहित मिलिट्री उपकरण बेचने के लिए 4 अरब डॉलर से ज्यादा का सौदा किया है।














