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  • पीएफ पर इस बार कितना मिलेगा ब्याज? EPFO ले लिया फैसला, जानें अकाउंट में कब आएगी रकम

    नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ ) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर 8.25 फीसदी ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह लगातार दूसरा साल है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में आयोजित केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक


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    By Azad Hind Desk मार्च 2, 2026
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    नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ ) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर 8.25 फीसदी ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह लगातार दूसरा साल है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में आयोजित केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक में ईपीएफ की ब्याज दर को लेकर यह फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) ने की।
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    पिछले वर्षों में ब्याज दर का उतार-चढ़ाव

    • ईपीएफओ ने 2019-20 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 2018-19 के लिए निर्धारित 8.65 प्रतिशत से घटाकर सात वर्षों में सबसे कम 8.5 प्रतिशत कर दिया था।
    • वित्त वर्ष 2016-17 में अपने ग्राहकों को 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दर प्रदान की थी। 2015-16 में ब्याज दर थोड़ी अधिक यानी 8.8 प्रतिशत थी।
    • वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 दोनों वर्षों में 8.75 प्रतिशत की ब्याज दर दी, जो 2012-13 की 8.5 प्रतिशत दर से अधिक थी। 2011-12 में ब्याज दर 8.25 प्रतिशत थी।

    पैसा कब आएगा अकाउंट में?

    सीबीटी के फैसले के बाद प्रस्तावित ब्याज दर को अंतिम स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा। औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद 7 करोड़ से अधिक ईपीएफओ सदस्यों के खातों में नई ब्याज दर के अनुसार रकम जमा की जाएगी।

    ईपीएफ पर ब्याज की गणना मासिक आधार पर की जाती है, लेकिन इसे वित्त वर्ष के आखिर में अकाउंट में जमा किया जाता है। हालांकि, जो खाते 36 महीने तक निष्क्रिय रहते हैं, उन पर आगे ब्याज नहीं मिलता और उन्हें डॉर्मेंट माना जाता है।

    एकमुश्त अमनैस्टी स्कीम को भी मंजूरी

    सीबीटी बोर्ड ने आयकर मान्यता प्राप्त ट्रस्टों से जुड़े अनुपालन मुद्दों के समाधान के लिए एकमुश्त अमनैस्टी योजना को भी स्वीकृति दी। यह योजना Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952 के प्रावधानों के तहत लागू होगी।

    प्रस्तावित योजना के तहत छह माह की निर्धारित अवधि में संस्थानों और ट्रस्टों को अनुपालन का अवसर दिया जाएगा। जिन संस्थानों ने वैधानिक योजना के बराबर या बेहतर लाभ दिए हैं, उनके लिए क्षतिपूर्ति, ब्याज और दंड में छूट का प्रावधान रहेगा। इस कदम से 100 से अधिक लंबित कानूनी मामलों के समाधान की उम्मीद है, जिससे हजारों ट्रस्ट सदस्यों को लाभ मिलेगा।

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