पीएम मोदी होंगे नितिन नबीन के प्रस्तावक!
आज़ाद हिन्द ऑनलाइन ने अपनी एक रिपोर्ट (5 जनवरी, 2026) में पहले ही बता दिया था कि बीजेपी को मकर संक्रांति के बाद 20 जनवरी तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। इस खबर पर मुहर लगी है और बीजेपी को नितिन नबीन के रूप में इसी दिन नया अध्यक्ष मिलने जा रहा है। सूत्रों ने बताया है कि नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावकों में एक नाम खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी हो सकता है।
19 जनवरी को होगी चुनाव नतीजे की घोषणा
संभावना है कि 19 जनवरी को ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के चुने जाने की औपचारिक घोषणा हो जाएगी। इस दौरान पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय मंत्री, बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश इकाइयों के अध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी चुनाव नतीजे की घोषणा के दौरान पार्टी मुख्यालय में मौजूद रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन के लिए प्रस्तावकों और उसका समर्थन करने वाले लोगों के हस्ताक्षरों के साथ नामांकन पत्र के कई सेट बनाने की तैयारियां चल रही हैं।
सबसे कम उम्र में बनेंगे बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया को लेकर मंगलवार को इसके संयोजक के लक्ष्मण ने दिल्ली में एक बैठक भी की। इस बैठक में इस चुनाव के सह-संयोजक संबित पात्रा और नरेश बंसल भी मौजूद थे। इस हफ्ते के अंत तक चुनाव प्रक्रिया का पूरा खाका जारी किया जाना है। 46 साल की उम्र में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले नितिन नबीन बीजेपी के सबसे कम उम्र के नेता होंगे। वह सबसे ज्यादा समय तक इस पद पर रहने वाले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की जगह लेंगे।
संगठन में बदलाव नए अध्यक्ष की पहली चुनौती
नितिन नबीन बीजेपी युवा मोर्चा में काम करके पार्टी के शिखर तक पहुंचे हैं। उनके कार्यभार संभालने के बाद पार्टी संगठन में भी भारी बदलाव की संभावना है और इसके युवा कार्यकर्ताओं की एक लंबी जमात है, जो बदले हालात में पार्टी में अपने लिए बड़ी भूमिका की उम्मीद कर रहे हैं। क्योंकि, बीजेपी मुख्यालय में इन दिनों नितिन नबीन को शुभकामाएं देने आने वाले ऐसे नेताओं की लंबी लिस्ट होने लगी है। ऐसे में उनके लिए संगठन में बदलाव भी एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।
विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के लिए बड़ी चुनौती
नितिन नबीन की बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर औपचारिक ताजपोशी के साथ ही कुछ बड़ी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना है, जिनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनाव भी शामिल है, जहां बीजेपी कभी सत्ता में नहीं आई है। यही नहीं, असम और पुडुचेरी में भी चुनाव है, जहां बीजेपी सत्ता में है और यहां सरकार में वापसी भी एक बड़ी चुनौती होगी।














