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  • पुनर्वास संस्था के रूप में काम करे ओपन जेल, सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ओपन जेलों के विस्तार और सुधार के लिए पैन इंडिया निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि इन्हें सुधार और पुनर्वास की सार्थक संस्थाओं के रूप में कार्य करना चाहिए। बेंच ने कहा कि ये निर्देश इसलिए जारी किए जा रहे हैं ताकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,


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    By Azad Hind Desk मार्च 2, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ओपन जेलों के विस्तार और सुधार के लिए पैन इंडिया निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि इन्हें सुधार और पुनर्वास की सार्थक संस्थाओं के रूप में कार्य करना चाहिए। बेंच ने कहा कि ये निर्देश इसलिए जारी किए जा रहे हैं ताकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत प्रदत्त समानता, भेदभाव-निषेध और गरिमा के साथ जीने के अधिकार के संवैधानिक दायित्व को देशभर की जेलों के प्रशासन में सार्थक रूप से लागू किया जा सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के आंकड़ों का किया उल्लेख

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान बंद जेलों की तुलना में ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन्स (ओपन जेल) के आर्थिक लाभ पर भी ध्यान दिया। राजस्थान के आंकड़ों का उल्लेख किया, जिनके अनुसार बंद जेल में एक कैदी पर राज्य को प्रति माह लगभग 3,000 खर्च करने पड़ते हैं, जबकि ओसीआई में एक कैदी पर प्रति माह लगभग 50 रुपये का खर्च आता है।

    कोर्ट ने दिया निर्देश

    अदालत ने कहा कि विशेष रूप से इस गंभीर अंतर, बल्कि यह कहें कि बंद जेलों की तुलना में ओपन ओसीआई के गंभीर आर्थिक लाभ पर ध्यान दिया है। कोर्ट ने ये निर्देश जेलों में भीड़भाड़ और ओपन जेल के संचालन से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए। अदालत ने गोवा, हरियाणा, झारखंड, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और तेलंगाना राज्यों, जहां वर्तमान में कोई भी कार्यरत ओसीआई नहीं है, को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता का आकलन करने और एक प्रोटोकॉल तैयार करने का निर्देश दिया।

    संस्थानों का नहीं हो रहा पूरा उपयोग

    मई 2024 में न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि खुली जेलों या शिविरों की स्थापना भीड़भाड़ की समस्या का एक समाधान हो सकती है और यह भी उल्लेख किया था कि ऐसा तंत्र राजस्थान में कार्यरत है। 17 मई 2024 को न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक मॉडल प्रारूप मैनुअल तैयार किया है, जिसमें खुली जेलों को ओसीआई के रूप में रेफर किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि इन संस्थानों का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है।

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