संवैधानिक क्लब, जयपुर में आयोजित एक हाई-टी कार्यक्रम में बोलते हुए ब्लैकमैन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर उनका रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में लिए गए फैसले से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें 1990 के दशक की शुरुआत में हुई घटनाओं में हैं। उन्होंने विशेष रूप से कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन का उल्लेख किया और कहा कि उसी दौर में उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी थी।
कश्मीरी पंडितों की हत्या के बाद की थी 370 हटाने की मांग
ब्रिटिश सांसद ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग मैनें 1992 में ही की थी, जब कश्मीरी पंडितों को उनके धर्म और पहचान के कारण उनके पैतृक घरों से निकाला गया। उस समय हमने एक बड़ा जनसभा आयोजित कर यह कहा था कि यह गलत है, अन्यायपूर्ण है।’
भारत के अधीन होना चाहिए पूरा जम्मू-कश्मीर: बॉब ब्लैकमैन
बॉब ब्लैकमैन ने आगे कहा कि उन्होंने हमेशा जम्मू-कश्मीर में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों की निंदा की, साथ ही पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे की निंदा की है। ब्रिटिश सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, शुरू से ही मेरी राय रही है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा इलाका भारत के अधीन हो।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आंतकी हमले में 26 भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भी ब्रिटिश सासंद बॉब ब्लैकमैन ने हमले की निंदा की थी। उन्होंने कहा, फिलहाल भारत में शांति है लेकिन मैने सरकार से आग्रह किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ी रहे।
ब्रिटेन की संसद में पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, आतंकियों के खिलाफ का भारत का कदम सही है। मैं पहलगाम हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों की मौत से स्तब्ध हूं। हालांकि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव के बाद विराम के कदम का भी स्वागत किया था।














