सुरेश कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) खड़कवासला से स्नातक किया। साल 1965 में पायलट के तौर पर सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना से जुड़े। कलमाड़ी ने 1965 के साथ-साथ 1971 की जंग में भी हिस्सा लिया था। बताया जाता है कि सुरेश कलमाड़ी के पिता डॉ. के शामराव पुणे के मशहूर समाजसेवी थे। पुणे में कन्नड़ स्कूल और कन्नड़ संघ की शुरुआत कलमाड़ी के पिता ने ही की थी। इसके पीछे की वजह यह थी कि कलमाड़ी का परिवार कर्नाटक का रहने वाला था।
शरद पवार ने कलमाड़ी को भेजा था राज्यसभा
सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस में लंबे समय तक रहे, लेकिन जब शरद पवार कांग्रेस से अलग हुए और उन्होंने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया तो कलमाड़ी भी पवार के साथ हो गए। शरद पवार ने कलमाड़ी को अपनी पार्टी की युवा इकाई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। वो शरद पवार ही थे, जिन्होंने कलमाड़ी को पहली बार 1982 में राज्यसभा भेजा। हालांकि, बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
किस सरकार में रेल मंत्री बने थे कलमाड़ी
साल 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में पुणे के सांसद विट्ठलराव गाडगिल की हार हुई। इस घटना के बाद ही सुरेश कलमाड़ी ने कांग्रेस की स्थानीय कमान अपने हाथों में ले ली। बाद में सुरेश कलमाड़ी नरसिम्हाराव की सरकार में कंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री बने। कलमाड़ी के नाम पर ऐसे एकमात्र रेलमंत्री होने का खिताब है, जिन्होंने रेलवे राज्यमंत्री होते हुए संसद में रेल बजट प्रस्तुत किया।
लंबे समय तक संभाली IOA की कमान
कहा जाता है कि कलमाड़ी का खेल से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था, लेकिन फिर वह एथलेटिक्स फेडरेशन के पहले प्रमुख बने और फिर ओलंपिक संघ से भी जुड़ गए। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष के रूप में सुरेश कलमाड़ी ने लंबे समय तक भारतीय खेलों की कमान संभाली। बाद में साल 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स को उनके करियर के लिए मील का पत्थर माना जाता है। हालांकि, इस आयोजन से जुड़े विवाद भी कम नहीं हैं।














