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  • पेट में जाकर मरीज से बात करेगी बात गोली, गैजेट्स के बाद कैप्‍सूल में लगी चिप, जानें किस काम आएगी?

    New Research: स्‍मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप जैसे गैजेट्स में चिप लगाई जाती है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने दवा में भी चिप लगा दी है। एक ऐसी गोली को बनाया गया है जो पेट में जाने के बाद मरीज से कम्‍युनिकेट करेगी। मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (MIT) के रिसर्चर्स ने गोली को विकसित किया है। एक रिपोर्ट


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    New Research: स्‍मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप जैसे गैजेट्स में चिप लगाई जाती है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने दवा में भी चिप लगा दी है। एक ऐसी गोली को बनाया गया है जो पेट में जाने के बाद मरीज से कम्‍युनिकेट करेगी। मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (MIT) के रिसर्चर्स ने गोली को विकसित किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पेट में जाने के बाद गोली यह बता देती है कि वह घुल गई है या नहीं। कहा जा रहा है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए मददगार हो सकती है, जिन्‍हें लंबे वक्‍त तक किसी बीमारी की वजह से दवाओं का सेवन करना पड़ता है।

    कैप्‍सूल में होगी फ‍िट

    MIT न्‍यूज की रिपोर्ट के अनुसार, गोली में चिप रूपी रेडियो फ्रीक्‍वेंसी एंटीना लगा है। यह बायोडिग्रेडेबल होता है यानी पेट में जाने के बाद यह घुल जाता है। जैसी ही मरीज गोली निगल लेता है, तो चिप से मरीज को सिग्‍नल भेजा जाता है कि गोली पेट में घुल गई है। अपना काम करने के बाद एंटीना यानी चिप शरीर से बाहर निकल जाती है।

    चिप वाली गोली से किसे फायदा

    रिपोर्ट कहती है कि इस तरह की गोली उनके लिए फायदेमंद होगी, जिनका ट्रांसप्‍लांट हुआ है। ऐसे मरीजों को लंबे वक्‍त तक दवाओं का सेवन करना होता है। कहा जा रहा है कि एचआईवी और टीबी के मरीजों के लिए गोली फायदेमंद होगी।

    हर बीमारी की गोली अलग, फ‍िर चिप कैसे काम करेगी

    रिसर्चर्स ने जिस गोली को तैयार किया है, उसमें मुख्‍य रूप से रेडियो फ्रीक्‍वेंसी एंटीना ही काम करता है। इस गोली को किसी भी कैप्‍सूल में पहनाकर उसे खाया जाता है। यानी यह किसी दवा के साथ लगकर काम करती है और पेट में जाकर इसका एंटीना, मरीज से बात करने के लिए एक्‍ट‍िवेट हो जाता है।

    एक्‍सपर्ट ने क्‍या कहा

    MIT में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के असोसिएट प्रोफेसर और ब्रिगहम एंड विमेंस हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, जियोवानी ट्रावेर्सो कहा कहना है कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को वह थेरेपी मिले जिसकी उन्हें जरूरत है, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर हो सके।

    दवा लेने में होती है लापरवाही

    बहुत से मरीजों के साथ यह कॉमन समस्‍या है कि वो दवा लेने में लापरवाही करते हैं। इस वजह से कइयों की जान चली जाती है। जिस रिसर्च टीम ने चिप वाली गोली बनाई है, उसी टीम ने पहले एक ऐसी गोली बनाई थी जो शरीर में जाने के बाद कई द‍िनों तक काम करती थी और थोड़ी-थोड़ी दवा रिलीज करके उन्‍हें बीमारी से बचाती थी। लेकिन यह तरीका हर बीमारी में कारगर नहीं है। चिप वाली गोली इसका विकल्‍प बन सकती है।

    क्‍या होती है रेडियो फ्रीक्‍वेंसी

    रेडियो फ्रीक्‍वेंसी एक तरह का सिग्‍नल है, जिसे किसी टूल की मदद से पकड़ा जाता है। इससे पता चलता है कि सिग्‍नल कहां से आ रहे हैं। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि मरीजों के साथ जब गोली कम्‍युनिकेट करेगी तो क्‍या उन्‍हें कोई डिवाइस इस्‍तेमाल करन होगा।

    पेट में जाकर कैसे काम करती है गोली

    रिसर्चर्स ने जिंक का इस्‍तेमाल करके गोली को बनाया है। दवा को उसके अंदर रखकर निगला जाता है। पेट में जाते ही गोली का बाहरी हिस्‍सा घुल जाता है और चिप पेट में बाहर आ जाती है और मरीज के साथ कम्‍युनिकेट करना शुरू कर देती है। बताया जाता है कि गोली निगलने के 10 मिनट के बाद मरीज-गोली के बीच कम्‍युनिकेशन हो जाता है। इसे मार्केट में कब तक लाया जाएगा, अभी स्‍पष्‍ट नहीं है।

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