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  • प्रलय के सबसे करीब पहुंची डूम्सडे क्लॉक, अब सिर्फ 85 सेकंड दूर, इंसानियत के खत्म होने का समय?

    वॉशिंगटन: वैश्विक तनाव और अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच वैज्ञानिकों ने प्रलय की घड़ी के समय को आधी रात के और भी करीब कर दिया है। यह एक संकेत है कि मानवता खतरनाक तरीके से तबाही के करीब पहुंच रही है। वैज्ञानिकों ने इस प्रलय की घड़ी को आधी रात से 85


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    By Azad Hind Desk जनवरी 28, 2026
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    वॉशिंगटन: वैश्विक तनाव और अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच वैज्ञानिकों ने प्रलय की घड़ी के समय को आधी रात के और भी करीब कर दिया है। यह एक संकेत है कि मानवता खतरनाक तरीके से तबाही के करीब पहुंच रही है। वैज्ञानिकों ने इस प्रलय की घड़ी को आधी रात से 85 सेकंड पहले सेट कर दिया है, जो 80 साल के इतिहास में सबसे करीब है। बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट ने मंगलवार को इसकी घोषणा की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि परमाणु युद्ध का खतरा और तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का डर खतरनाक बिंदु पर पहुंच गया है।

    इंसानियत के पास कम हो रहा समय

    वॉशिंगटन डीसी में घड़ी को चार सेकंड आगे अपडेट किए जाने के बाद बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट की अध्यक्ष एलेक्जेंड्रा बेल ने कहा, प्रलय की घड़ी का संदेश इससे ज्यादा साफ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, तबाही का खतरा बढ़ रहा है, सहयोग कम हो रहा है और हमारे पास समय कम होता जा रहा है।

    परमाणु हथियारों का बढ़ रहा खतरा

    उन्होंने कहा कि बदलाव जरूरी भी है और मुमकिन भी, लेकिन ग्लोबल कम्युनिटी को अपने नेताओं से तुरंत कार्रवाई की मांग करनी चाहिए। बेल ने कहा कि बुलेटिन के साइंस और सिक्योरिटी बोर्ड का मानना है कि इंसानियत ने उन बड़े खतरों पर तरक्की नहीं की है जो हम सभी को खतरे में डालते हैं। इसलिए हम घड़ी को आगे बढ़ाते हैं। परमाणु हथियारों, क्लाइमेट चेंज और नुकसान पहुंचाने वाली तकनीक से हमें जो खतरे हैं, वे सभी बढ़ रहे हैं। हर सेकंड कीमती है और हमारे पास समय कम होता जा रहा है। यह एक कड़वी सच्चाई है।

    साइंस एंड सिक्योरिटी बोर्ड के चेयरमैन डेनियल होल्ज ने चेतावनी दी कि एक बंटी हुई दुनिया पूरी इंसानियत को और भी कमजोर बना सकती है। बोर्ड ने कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतें ज्यादा आक्रामक और विरोधी होती जा रही हैं जिससे मुश्किल से हुए ग्लोबल समझौते टूट रहे हैं। इससे अस्तित्व के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं बदले गए तो तबाही की संभावना और बढ़ जाएगी।

    प्रलय की घड़ी क्या है?

    प्रलय की घड़ी दुनिया को बताने का एक प्रतीकात्मक तरीका है कि इंसानियत इंसानों से निर्मित तबाही से खुद को खत्म करने के कितने करीब है। आधी रात उस पॉइंट को दिखाती है जब धरती इंसानों के रहने लायक नहीं रह जाएगी। अगर घड़ी आधी रात के करीब जाती है तो इसका मतलब है कि इंसानियत खुद को खत्म करने के करीब पहुंच रही है। पिछले साल वैज्ञानिकों ने घड़ी को आधी रात से 89 सेकंड दूर सेट किया था। मंगलवार को इसे चार सेकंड और कम कर दिया गया। 1991 में शीत युद्ध के खत्म होने पर सुइयां सबसे ज्यादा दूर सेट की गई थीं।

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