दरअसल, दुनिया के प्रमुख समुद्री बीमाकर्ताओं ने फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए ‘वॉर-रिस्क’ बीमा कवर वापस लेने का फैसला किया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार International Group of Protection and Indemnity Clubs के आधे से अधिक सदस्यों ने नोटिस जारी कर कहा है कि 5 मार्च को लंदन समयानुसार आधी रात से फारस की खाड़ी, आसपास के जलक्षेत्र और ईरानी समुद्री सीमा में प्रवेश करने वाले जहाजों का वॉर-रिस्क इंश्योरेंस स्वतः समाप्त हो जाएगा। यह बदलाव केवल युद्ध जोखिम कवर पर लागू होगा, जबकि अन्य बीमा शर्तें यथावत रहेंगी।
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क्या पड़ेगा असर?
वॉर-रिस्क इंश्योरेंस जहाज मालिकों और चार्टर कंपनियों को युद्ध, आतंकवाद और समुद्री डकैती जैसे जोखिमों से होने वाले नुकसान से सुरक्षा देता है। इसके हटने से शिपिंग कंपनियों की जोखिम गणना बदल जाएगी। ऐसे में इसका ये असर दिखाई दे सकता है:
- कुछ जहाज मालिक खाड़ी क्षेत्र में जाने से बच सकते हैं।
- मालभाड़ा दरों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
- वैकल्पिक बीमा प्रीमियम बेहद महंगे हो सकते हैं।
क्या महंगा हो जाएगा तेल?
चूंकि इंश्योरेंस खत्म होने से शिपिंग कंपनियां मालभाड़ा दरों में इजाफा कर सकती हैं। ऐसे में इन अतिरिक्त लागतों का असर कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की अंतिम कीमत पर पड़ेगा। यानी तेल महंगा हो जाएगा, जिसका असर आम आदमी की जेब पर भी दिखाई दे सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा
इंश्योरेंस खत्म होने का निर्णय Persian Gulf (फारस की खाड़ी) के अलावा Gulf of Oman (ओमान की खाड़ी) और Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) से जुड़े समुद्री मार्गों को भी प्रभावित करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट मार्ग है, जहां से लगभग 20% वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति गुजरती है। किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों को झटका दे सकती है।













