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  • फिर आ गई महंगाई डायन… तेल से लेकर साबुन तक सब हुए महंगे, गिरते रुपये ने बढ़ाई टेंशन

    नई दिल्ली: देश में महंगाई फिर लौट आई है। एफएमसीजी यानी रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियां अब अपनी चीजों के दाम बढ़ाने लगी हैं। इनमें तेल से लेकर साबुन तक शामिल हैं। कंपनियों ने सितंबर 2025 में जीएसटी में कटौती के बाद चीजों की कीमत नहीं बढ़ाई थी। लेकिन अब बढ़ती महंगाई और कमजोर


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    By Azad Hind Desk फरवरी 18, 2026
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    नई दिल्ली: देश में महंगाई फिर लौट आई है। एफएमसीजी यानी रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियां अब अपनी चीजों के दाम बढ़ाने लगी हैं। इनमें तेल से लेकर साबुन तक शामिल हैं। कंपनियों ने सितंबर 2025 में जीएसटी में कटौती के बाद चीजों की कीमत नहीं बढ़ाई थी। लेकिन अब बढ़ती महंगाई और कमजोर होते रुपये की वजह से उनके मुनाफे पर असर पड़ रहा है।

    इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इसलिए कंपनियां रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की 5% तक कीमतें बढ़ा रही हैं। डिस्ट्रिब्यूटर्स ने बताया कि इस तिमाही में डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमत बढ़ गई है। बढ़ी हुई कीमतों के साथ इस चीजों के पैकेट दुकानों तक पहुंचने लगे हैं।
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    कंपनियों ने बताया कीमत बढ़ाने का कारण

    डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि उनकी कंपनी, जो रियल जूस और वाटिका हेयर ऑयल बनाती है, इस तिमाही में 2% कीमतें बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ये बढ़ी हुई कीमतें अगले साल भी जारी रहेंगी। उन्होंने बताया, ‘हमें एंटी-प्रॉफिटियरिंग (मुनाफेखोरी विरोधी) नियमों की वजह से कीमतें बढ़ाने में देरी करनी पड़ी थी।’ कीमतें बढ़ने के ये भी कारण हैं:

    • हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे सल्फर और एन-पैराफिन जैसे जुड़े हुए सामानों की लागत भी बढ़ गई है। वहीं, नारियल तेल की कीमतें पिछले साल दोगुनी हो गई हैं।
    • रुपये के कमजोर होने से भी सामानों को बनाने की लागत बढ़ गई है। रुपया कई महीनों से लगातार गिर रहा है और 30 जनवरी को डॉलर के मुकाबले यह 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसका मुख्य कारण व्यापार घाटा और वैश्विक आर्थिक असंतुलन है।

    चीजों पर रुपये का असर क्यों और कैसे?

    ब्रेकफास्ट सीरियल्स, मूसली और ओट्स बनाने वाली कंपनी बैगरीज (Bagrry’s) के ग्रुप डायरेक्टर आदित्य बैगरी ने कहा कि ओट्स और बादाम जैसे नाश्ते के सामानों में इस्तेमाल होने वाली बहुत सारी सामग्री आयात की जाती है। रुपये के गिरने से आयात की लागत काफी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी इस तिमाही में चुनिंदा पैकेटों पर कीमतों में मामूली बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।

    साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट और पर्सनल केयर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां काफी हद तक कच्चे तेल से बनने वाले प्रोडक्ट पर निर्भर करती हैं। इससे लिक्विड पैराफिन और सर्फेक्टेंट जैसे जुड़े हुए सामानों की लागत पर असर पड़ता है।

    होम केयर प्रोडक्ट भी हुए महंगे

    हिंदुस्तान यूनिलीवर के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर निरंजन गुप्ता ने पिछले हफ्ते एक निवेशक कॉल में कहा था, ‘होम केयर प्रोडक्ट की कीमतों में बढ़ोतरी जल्द ही देखने को मिलेगी। बढ़ी हुई कीमतों वाले कुछ पैकेट पहले से ही बाजार में जा रहे हैं और कुछ और भी जाएंगे।’ कंपनी अपने होम केयर सेगमेंट में कीमतें बढ़ा रही है। इसमें सर्फ एक्सेल, रिन, विम और डोमेक्स जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं।

    चाय भी हुई महंगी

    टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील डीसूजा ने तीसरी तिमाही के बाद कंपनी की कमाई की कॉल में बताया था कि दिसंबर तिमाही के अंत में चाय की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने कहा था कि जनवरी से अप्रैल की शुरुआत तक का समय शुरुआती कीमतों को तय करेगा। उन्होंने कहा था, ‘हम इस बात पर लचीलापन रखेंगे कि जब सीजन खुलेगा तो कच्चे माल की कीमत कैसी रहेगी, उसके हिसाब से कीमतों को ऊपर या नीचे ले जाएंगे।’ यानी चाय की कीमत में बदलाव हो सकता है।

    मुनाफे पर पड़ रहा असर

    वित्तीय सेवा फर्म सिस्टमैटिक्स ग्रुप ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा था कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 9% की साल-दर-साल राजस्व वृद्धि के बावजूद, एफएमसीजी कंपनियां अपने मुनाफे को बढ़ाने में मुश्किलों का सामना कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार बिस्कुट, नूडल्स और स्नैक फूड्स पर जीएसटी कटौती के कारण बिक्री की मात्रा में औसतन 6% की साल-दर-साल वृद्धि हुई।

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