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  • फ्रांस को यूं ही नहीं आई भारत की याद, राफेल महाडील अमेरिका से लेकर रूस तक को संदेश, एक्‍सपर्ट से जानें

    पेरिस/नई दिल्‍ली: डोनाल्‍ड ट्रंप की धमकियों से जूझ रहे फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भारत के दौरे पर मुंबई पहुंच गए हैं। इस तीन दिवसीय दौरे पर भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट से लेकर कई आर्थिक डील पर हस्‍ताक्षर होना है। साल 2017 में सत्‍ता संभालने के बाद यह इमैनुअल मैक्रों


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    By Azad Hind Desk फरवरी 17, 2026
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    पेरिस/नई दिल्‍ली: डोनाल्‍ड ट्रंप की धमकियों से जूझ रहे फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भारत के दौरे पर मुंबई पहुंच गए हैं। इस तीन दिवसीय दौरे पर भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट से लेकर कई आर्थिक डील पर हस्‍ताक्षर होना है। साल 2017 में सत्‍ता संभालने के बाद यह इमैनुअल मैक्रों की चौथी भारत यात्रा है। इमैनुअल मैक्रां ऐसे समय पर भारत के साथ करीबी बढ़ा रहे हैं जब डोनाल्‍ड ट्रंप यूरोपीय देश ग्रीनलैंड पर कब्‍जे की धमकी दे रहे हैं। इसको लेकर मैक्रों खुलकर ट्रंप के खिलाफ निशाना साध चुके हैं। वहीं ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर साथ नहीं देने पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। वहीं भारत और अमेरिका के बीच भी काफी लंबे समय तक टैरिफ वार चलने के बाद अब ट्रेड डील हुई है। एक्‍सपर्ट का कहना है कि न केवल भारत को बल्कि फ्रांस समेत यूरोपीय देशों को अमेरिका के सामने ‘रणनीतिक स्‍वायत्‍ता’ बनाए रखने के लिए नई दिल्‍ली के साथ की जरूरत है। आइए जानते हैं पूरा मामला…

    रणनीतिक मामलों के एक्‍सपर्ट माथ‍िईयू ड्रोइन ने CSIS में लिखे अपने लेख में कहा कि यह केवल हथियार डील नहीं है, बल्कि फाइटर जेट कूटनीति है। ड्रोइन ने कहा कि राफेल फाइटर जेट खरीदने के पीछे उसकी बेजोड़ ताकत और प्रदर्शन कम बल्कि रणनीतिक स्‍वायत्‍ता को हासिल करने की कोशिश ज्‍यादा है। उन्‍होंने कहा कि भारत अपनी रूस पर से निर्भरता को कम करना चाहता है। भारत को फ्रांस के रूप में एक राजनीतिक रूप से व‍िश्‍वसनीय सप्‍लायर मिल गया है जो रूस की तरह से ही कल पुर्जों और हथियारों की आपूर्ति की गारंटी देता है।

    फ्रांस को राफेल डील से दो बड़े फायदे

    माथ‍िईयू ड्रोइन कहते हैं कि राफेल डील के जरिए फ्रांस भारत को तकनीक ट्रांसफर कर रहा है । राफेल को भारत में बनाया जाएगा और करीब 50 फीसदी हिस्‍सा स्‍वदेशी होगा। इससे भारत की घरेलू क्षमता बढ़ेगी और किसी एक ताकत पर उसकी निर्भरता नहीं रहेगी। उन्‍होंने कहा कि राफेल खरीदने से भारत की उस रणनीति को मदद मिलेगी जिसमें वह मल्‍टीपोलर वर्ल्‍ड में अमेरिका, रूस और यूरोप के बीच संतुलन स्‍थापित करना चाहता है। वहीं एक अन्‍य एक्‍सपर्ट Gaspard Schnitzler ने फ्रांस के इंस्‍टीट्यूट फॉर इंटरनैशनल एंड स्‍ट्रेटजिक अफेयर्स में लिखे अपने लेख में फ्रांस के लिए भी भारत के साथ दोस्‍ती और राफेल डील के महत्‍व पर जोर दिया है।

    गासपर्ड ने लिखा कि फ्रांस के राफेल फाइटर जेट जैसे हथियार निर्यात करने से दो मुख्‍य उद्देश्‍य पूरे होते हैं। पहला- संप्रभुता और दूसरा प्रभाव। उन्‍होंने कहा कि इस निर्यात से फ्रांस का रक्षा औद्योगिक और तकनीकी आधार विकसित होता रहेगा। इससे उसकी बेहद जटिल क्षमता, प्रोडक्‍शन लाइन और रणनीतिक स्‍वायत्‍ता बनी रहेगी। इसे फ्रांस का घरेलू ऑर्डर अकेले सपोर्ट नहीं कर सकता है। यही नहीं अगर इन हथियारों का ज्‍यादा संख्‍या में निर्माण किया जाता है तो प्रति यूनिट खर्च भी काफी कम हो जाएगा।

    अमेरिका पर बुरी तरह से निर्भर है यूरोप

    गासपर्ड ने दूसरा कारण बताया कि हथियारों की बिक्री को केवल व्‍यवसायिक समझौता नहीं बल्कि राजनीतिक और राज‍नयिक तरीका माना जाता है। इसमें रक्षा सहयोग और रणनीतिक भागीदारी भी शामिल होती है जिससे फ्रांसीसी प्रभाव बढ़ता है और एक-दूसरे पर निर्भरता बढ़ती है। यही नहीं भारत को राफेल डील से यूरोप के रणनीतिक स्‍वायत्‍तता को लेकर चल रही बहस से जोड़कर देखा जाना चाहिए। एक अन्‍य विशेषज्ञ Jacopo Barigazzi ने पोलिटिको में लिखे अपने लेख में कहा कि यूरोप के देश घातक हथियार तो बना सकते हैं लेकिन वे खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक्‍स, कम्‍यूनिकेशन, रिफ्यूलिंग, स्‍पेस असेट और कमांड एंड कंट्रोल के लिए अमेरिका पर बुरी तरह से निर्भर हैं।

    भारत और फ्रांस क्‍यों आए साथ?

    जकोपो कहते हैं कि यूरोपीय अधिकारी बताते हैं कि अमेरिकी निर्भरता को खत करना उनकी प्राथमिकता है और आत्‍मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में पहला कदम है। हालांकि वे चेतावनी देते हैं कि इससे खर्च जीडीपी का 10 फीसदी हो सकता है। यूरोप को निगरानी, स्‍पेस और कमांड एंड कंट्रोल स्‍थापित करने में बहुत बड़े पैमाने पर खर्च करना होगा। उन्‍होंने कहा कि यूरोप में एक मजबूत रक्षा उद्योग को बनाना आवश्‍यक है लेकिन इसे खुद से नहीं किया जा सकता है। इसकी वजह है कि स्‍वायत्‍ता केवल ज्‍यादा हथियार बनाने से नहीं आती है। यह एकीकृत क्षमता विकसित करने से आती है। फ्रांस और भारत की राफेल डील दोनों देशों को उनके उद्देश्‍यों में मदद करती है।

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