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  • फ्रेंड्स फॉर लाइफ के जरिए और आगे बढ़ेगी सैन्य कूटनीति

    नई दिल्ली: डिफेंस डिप्लोमेसी में एक कदम और आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने ‘फ्रेंड्स फॉर लाइफ’ नाम से एक खास डिजिटल पहल शुरू की है। इस वेबसाइट का मकसद उन मित्र देशों के सैन्य और पूर्व सैन्य अधिकारियों को एक साथ जोड़ना है, जिन्होंने अलग-अलग वक्त पर भारतीय सेना के प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग


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    By Azad Hind Desk फरवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली: डिफेंस डिप्लोमेसी में एक कदम और आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने ‘फ्रेंड्स फॉर लाइफ’ नाम से एक खास डिजिटल पहल शुरू की है। इस वेबसाइट का मकसद उन मित्र देशों के सैन्य और पूर्व सैन्य अधिकारियों को एक साथ जोड़ना है, जिन्होंने अलग-अलग वक्त पर भारतीय सेना के प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग ली है। इस मंच के जरिए ये अधिकारी आपस में जुड़ेंगे, अनुभव साझा करेंगे, पेशेवर संवाद को आगे बढ़ा सकेंगे।

    क्या करेगी ये डिजिटल पहल

    भारतीय सेना के मुताबिक, यह डिजिटल मंच भारतीय सेना के प्रशिक्षण संस्थानों में साथ प्रशिक्षण ले चुके 99 देशों के सैन्य अधिकारियों और पूर्व छात्रों को जोड़ने का काम करेगा, ताकि उनके बीच पेशेवर संवाद बढ़ाया जा सके। भारतीय सेना का मानना है कि इससे भारतीय और विदेशी सैन्य अधिकारियों के बीच सहयोग और समझ को और मजबूती मिलेगी।

    इंडियन आर्मी ने 10 साल में इतने लोगों को दी ट्रैनिंग

    पिछले एक दशक में ही भारतीय सेना ने मित्र देशों के 21500 से अधिक सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है। ‘फ्रेंड्स फॉर लाइफ’ के जरिए इन सभी को एक ग्लोबल नेटवर्क में जोड़ने की पहल की गई है। श्रीलंका की सेना के मौजूदा कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वीकेजीएम लासंथा रोड्रिगो भी इंडियन मिलिट्री अकेडमी के छात्र रहे है। इसी तरह नेपाल के सेना प्रमुख भी जनरल अशोक राज सिगडेल भी आईएमए के पूर्व छात्र है।

    विदेशों के सेना अधिकारी भी ले चुके ट्रैनिंग

    बांग्लादेश, मलेशिया, भूटान के भी कई सीनियर अधिकारी भारतीय सेना के ट्रेनिंग संस्थानों में ट्रेनिंग ले चुके हैं। स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस अकेडमी में अमेरिका, यूके, कनाडा, जापान, फ्रांस से भी सैन्य अधिकारी आते हैं। भारतीय सेना के 34 अलग अलग इंस्टिट्यूट है, जिनमें मित्र देशों के सैन्य अधिकारी अलग अलग वक्त में ट्रेनिंग के लिए आते है। भारतीय सेना का ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC) सभी तरह के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालता है।

    क्राइसिस में कैसे मददगार ?

    क्राइसिस में कैसे मददगार ? भारतीय सेना और दूसरे देशो के सैन्य अधिकारियों का कनेक्शन सिर्फ ट्रेनिंग या जॉइंट ऑपरेशन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि क्राइसिस में भी यह कनेक्शन काम आता है। जब बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार का तख्ता पलट हुआ तो उस वक्त भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत की एकमात्र कड़ी दोनों देशो के आर्मी चीफ थे। राजनीतिक स्तर पर भले ही रिश्ते में उत्तार चढ़ाव देखा गया, लेकिन आर्मी टु आर्मी कनेक्शन में कोई फर्क नहीं पड़ा। हाल ही में इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि मेरी बांग्लादेश आर्मी चीफ से नियमित बातचीत होती है। हमारा मकसद ये है कि किसी तरह का मिसकम्युनिकेशन या गलतफहमी ना हो।

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