फ्लेक्सी कैप फंड्स में दिसंबर में कुल 10,019 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया। यह नवंबर के 8,135 करोड़ रुपये के इनफ्लो से 23% ज्यादा था। साल 2024 के दिसंबर की तुलना में इनफ्लो में 112% की भारी बढ़ोतरी हुई, जो तब 4,730 करोड़ रुपये था।
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इनफ्लो में क्यों आई तेजी?
बाजार के जानकारों का कहना है कि फ्लेक्सी कैप फंड में इनफ्लो बढ़ने की मुख्य वजह इन फंड्स की अपनी फ्लेक्सिबिलिटी है। साथ ही निवेशक भी आजकल थोड़ा सतर्क होकर निवेश कर रहे हैं। हालांकि, वे सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने लंबे समय के एसेट एलोकेशन (संपत्ति का बंटवारा) पर टिके रहना चाहिए और हाल के ट्रेंड्स के पीछे भागने से बचना चाहिए।
निवेशकों को मिल रहा बेहतर रिटर्न
प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ विशाल धवन ने ETMutualFunds को बताया कि यह कैटेगरी कई दूसरी कैटेगरी की तुलना में बेहतर रिटर्न दे रही है। साल 2025 में काफी उतार-चढ़ाव रहा और मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में रिटर्न कमजोर और असमान रहे। ऐसे में निवेशक उन फंड्स की ओर आकर्षित हुए हैं जो फंड मैनेजरों को वैल्यूएशन और कमाई की संभावना के आधार पर मार्केट कैप में बदलाव करने की आजादी देते हैं। इसी वजह से फ्लेक्सी-कैप फंड एक पसंदीदा और डायवर्सिफाइड कोर ऑप्शन बन गए हैं।
फाइनेंशियल रेडियंस के फाउंडर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) राजेश मिनोचा ने कहा कि वे हमेशा से फ्लेक्सी-कैप फंड्स की वकालत करते आए हैं और अब यह बात साबित हो गई है। उन्होंने कहा कि अच्छे फंड मैनेजर चुनें और उन्हें यह तय करने दें कि किस तरह की स्टॉक कैपिटल वाली कंपनियों में खरीदना और बेचना है।
लेकिन बरतें सावधानी
धवन ने यह भी कहा कि सिर्फ रेकॉर्ड इनफ्लो को देखकर निवेश बढ़ाना सही नहीं है। फ्लेक्सी-कैप फंड कोर होल्डिंग के तौर पर अच्छे हैं, लेकिन निवेशकों को अपने लंबे समय के एसेट एलोकेशन के हिसाब से ही निवेश बनाए रखना चाहिए। अगर निवेश बढ़ाना भी है तो धीरे-धीरे और जरूरत के हिसाब से बढ़ाना चाहिए। मौजूदा निवेशकों के लिए सबसे अच्छा यही है कि वे निवेशित रहें और थोड़े समय के इनफ्लो या बाजार के शोर के आधार पर कोई बदलाव न करें।















