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  • बचपन के कोच ने एक दिन पहले वैभव सूर्यवंशी को दिया गुरुमंत्र, अगले ही दिन भारत को बना दिया वर्ल्ड चैंपियन

    नई दिल्ली: अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलने वाले वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे उनके कोच मनीष ओझा का एक शिकायती संदेश और तकनीकी सुधार की बड़ी भूमिका रही है। सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाने के बाद मनीष ओझा


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    By Azad Hind Desk फरवरी 7, 2026
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    नई दिल्ली: अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलने वाले वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे उनके कोच मनीष ओझा का एक शिकायती संदेश और तकनीकी सुधार की बड़ी भूमिका रही है। सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाने के बाद मनीष ओझा ने वैभव को व्हाट्सएप पर एक खास संदेश भेजा था, जो एक तरह की चुनौती जैसा था। ओझा ने उससे कहा था कि यह शायद तुम्हारा पहला ऐसा टूर्नामेंट होगा जहां तुम एक भी शतक नहीं लगा पाओगे। उन्होंने वैभव को साफ हिदायत दी थी कि अगर तुम फाइनल में एक बार सेट हो गए, तो बड़ी पारी खेलकर ही वापस आना। कोच की यह बात वैभव को इस कदर लगी कि उन्होंने फाइनल में 15 चौकों और 15 छक्कों की मदद से मात्र 55 गेंदों में टूर्नामेंट का दूसरा सबसे तेज शतक जड़ा और कुल 175 रनों का विशाल स्कोर बनाया।

    पुल शॉट की तकनीकी खामी में किया सुधार

    मनीष ओझा ने बताया कि वैभव पुल शॉट खेलते समय एक छोटी तकनीकी समस्या का सामना कर रहे थे, जिसकी वजह से वह बड़े स्कोर को शतकों में नहीं बदल पा रहे थे। कोच ने गौर किया कि पुल शॉट मारते वक्त वैभव का सिर पीछे की ओर झुक जाता था और उनका पिछला घुटना थोड़ा दब जाता था। इस स्थिति में वे शरीर पर आने वाली गेंदों को तो आसानी से खेल लेते थे, लेकिन ऑफ-स्टंप के बाहर की शॉर्ट गेंदों पर उनके बल्ले का ऊपरी किनारा लग जाता था। कोच ने उन्हें सलाह दी कि ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंदों को पुल करने के लिए सिर को सीधा और गेंद की तरफ रखना चाहिए, जिससे हाथों को पूरा विस्तार मिले और शॉट में अधिक ताकत आए।

    14 साल की उम्र में किया कमाल

    वैभव की उम्र अभी 15 साल भी नहीं हुई है, लेकिन सीनियर लेवल पर उनके आंकड़े किसी दिग्गज खिलाड़ी की तरह नजर आते हैं। उनके नाम पहले ही घरेलू क्रिकेट में चार शतक दर्ज हैं, जिनमें एक आईपीएल शतक और एक विजय हजारे ट्रॉफी का शतक शामिल है। कोच ओझा का मानना है कि पिछले एक साल में वैभव की बल्लेबाजी में अद्भुत सुधार आई है। उनका घरेलू टी20 में उच्चतम स्कोर 144 और लिस्ट-ए में 190 रन है। कोच ने कहा कि वैभव की सबसे बड़ी खूबी उनकी सीखने की क्षमता है, वे उन सैकड़ों छात्रों में से इकलौते हैं जिन्हें कभी डांटने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि वे तकनीकी बातों को बहुत जल्दी समझ लेते हैं।

    ग्लैमर से दूर सिर्फ खेल पर है वैभव का ध्यान

    कम उम्र में मिली इतनी बड़ी शोहरत के बावजूद वैभव को बॉय वंडर के ग्लैमर से बचाकर रखा जा रहा है। पिछले आईपीएल के बाद से उनका शेड्यूल इतना पैक रहा है कि उन्हें बाहरी दुनिया की बातों पर ध्यान देने का मौका ही नहीं मिला। वे लगातार अंडर-19 दौरों, एशिया कप और रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट्स में व्यस्त रहे हैं। कोच और माता-पिता का मानना है कि वह अभी भी एक बच्चा ही है, इसलिए घर की कमी महसूस न हो इसके लिए परिवार अक्सर उनके मैचों के दौरान उनके साथ रहता है। उनकी सादगी और खेल के प्रति उनकी एकाग्रता ही उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा बनाती है।

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