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  • बदल जाएगा जीडीपी का नाम! अर्थव्यवस्था मापने के तरीके में बदलाव की तैयारी, क्या होगा नया पैमाना?

    नई दिल्ली: भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मापने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाने की सोच रहा है। अब तक हम सकल घरेलू उत्पाद (ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी जीडीपी ) को ही अर्थव्यवस्था का मुख्य पैमाना मानते आए हैं। लेकिन अब सरकार शुद्ध घरेलू उत्पाद (नेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी एनडीपी ) को ज्यादा अहमियत देने


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    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
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    नई दिल्ली: भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मापने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाने की सोच रहा है। अब तक हम सकल घरेलू उत्पाद (ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी जीडीपी ) को ही अर्थव्यवस्था का मुख्य पैमाना मानते आए हैं। लेकिन अब सरकार शुद्ध घरेलू उत्पाद (नेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी एनडीपी ) को ज्यादा अहमियत देने पर विचार कर रही है। यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र के राष्ट्रीय खातों की प्रणाली (SNA) 2025 के तहत किया जाएगा।

    इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार एसएनए 2025 के अनुसार एनडीपी को जीडीपी जैसे सकल मापों से ‘वैचारिक रूप से बेहतर’ बताया गया है। इसका मतलब है कि एनडीपी उत्पादन की असली लागत को ज्यादा अच्छे से बताता है। यह जीडीपी की तुलना में संपत्ति के मूल्य में होने वाली कमी (डेप्रिसिएशन) और प्राकृतिक संसाधनों के खत्म होने (डिप्लीशन) को भी ध्यान में रखता है।
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    अभी क्या है स्थिति?

    अभी भारत समेत दुनिया भर में जीडीपी ही अर्थव्यवस्था की सेहत बताने वाला सबसे बड़ा आंकड़ा है। भारत फिलहाल जीडीपी के साथ-साथ एनडीपी के सालाना अनुमान भी जारी करता है, लेकिन तिमाही एनडीपी के आंकड़े नहीं देता। हाल ही में 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2% रही, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। 2024-25 के लिए जीडीपी और एनडीपी दोनों में पिछले साल की तुलना में 6.5% की वृद्धि हुई।

    कैसे होती है एनडीपी की गणना?

    एनडीपी की गणना जीडीपी में से फिक्स्ड एसेट्स (स्थायी संपत्तियों) के डेप्रिसिएशन और प्राकृतिक संसाधनों के डिप्लीशन को घटाकर की जाती है। डेप्रिसिएशन का मतलब है उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली पूंजी के मूल्य में आई कमी। वहीं, रिसोर्स डिप्लीशन का मतलब है प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से उनकी मात्रा में आई कमी और भविष्य में होने वाले आर्थिक नुकसान को दर्शाता है। एनडीपी हमें यह समझने में मदद करेगा कि हम अपनी संपत्ति का कितना उपभोग कर रहे हैं और भविष्य के लिए कितना बचा रहे हैं।

    क्या है सरकार का प्लान?

    सांख्यिकी मंत्रालय इस बदलाव के लिए जरूरी डेटा और तरीकों की जांच कर रहा है। राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी पर सलाहकार समिति के तहत एक उप-समिति बनाई गई है जो इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करेगी। अधिकारियों का कहना है कि आईएमएफ के दिशानिर्देशों के अनुसार इसे 2029-30 तक लागू करने का लक्ष्य है।

    इसके अलावा, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जीडीपी के आधार वर्ष को भी बदल रहा है। अभी यह 2011-12 है, जिसे बदलकर 2022-23 किया जाएगा। इस नई श्रृंखला को 27 फरवरी को जारी किया जाएगा। यह बदलाव एसएनए 2008 ढांचे पर आधारित है, जो अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है।

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