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  • बलूचिस्तान की आजादी की मांग: क्षेत्रफल, सीमाएं और संघर्ष; क्या टूटने की कगार पर है पाकिस्तान?

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा की आग में जल रहा है। यह सूबा सिर्फ अशांति ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध, सेना की बर्बर कार्रवाई और सशस्त्र प्रतिरोध का गढ़ बन गया है। हाल के वर्षों में बलूच विद्रोहियों ने पूरे सूबे में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर कई भीषण हमले किए


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    By Azad Hind Desk फरवरी 6, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा की आग में जल रहा है। यह सूबा सिर्फ अशांति ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध, सेना की बर्बर कार्रवाई और सशस्त्र प्रतिरोध का गढ़ बन गया है। हाल के वर्षों में बलूच विद्रोहियों ने पूरे सूबे में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर कई भीषण हमले किए हैं। विद्रोहियों का कहना है कि वे अधिकारों और आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। खुद पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि बलूचिस्तान के विद्रोह से निपटना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बलूचिस्तान, पाकिस्तान से आजाद हो सकता है और अगर ऐसा होता है तो क्या होगा।

    बलूचिस्तान विद्रोह पाकिस्तान के लिए कितना खतरनाक

    पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चंद दिनों पहले संसद में स्वीकार किया था कि बलूच विद्रोही पहले से अधिक तैयार हैं। वे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसा पाकिस्तानी सेना के पास भी नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि एक-एक बलूच विद्रोही 20000 डॉलर तक के मिलिट्री गियर से लैस हैं। उनके असॉल्ट राइफल ही 2000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाले हैं। ऐसे में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह वास्तविकता है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में हालात नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने बलूचिस्तान में जारी विद्रोह को दबाने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अधिक सैनिकों की तैनाती का ऐलान भी किया है।

    क्या पाकिस्तान से अलग होगा बलूचिस्तान

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि बलूच विद्रोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें महिलाओं की तादाद बहुत अधिक है। यह बलूचिस्तान विद्रोह में जनभागीदारी की ओर इशारा करता है, जिसे दबा पाना पाकिस्तान के लिए और अधिक मुश्किल हो सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह विद्रोह अंत में पाकिस्तान को बलूचिस्तान को ज्यादा स्वायत्तता देने के लिए भी मजबूर कर सकता है। हालांकि, कई अन्य का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के लिए मुश्किलें और ज्यादा बढ़ेंगी, क्योंकि इसके बाद आजादी की बात उठेगी और फिर हथियारबंद विद्रोह तेज होगा। ऐसे में बलूचिस्तान के पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्रत देश के रूप में उभरने पर अनिश्चितता कायम है।

    बलूचिस्तान कितना बड़ा सूबा

    बलूचिस्तान क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह पाकिस्तान की कुल भूमि का लगभग44% है। बलूचिस्तान का क्षेत्रफलर 3,47,190 वर्ग किलोमीटर है। आकार में यह भारत के सबसे बड़े सूबे राजस्थान से भी बड़ है। उदाहरण के लिए राजस्थान का क्षेत्रफलर 342,239 वर्ग किलोमीटर, उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल 243,286 वर्ग किलोमीटर और बिहार का क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है।

    बलूचिस्तान की सीमाएं?

    बलूचिस्तान की सीमा पश्चिम में ईरान, उत्तर में अफगानिस्तान और पूर्व और उत्तर-पूर्व में पाकिस्तान के सिंध, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों से लगती है। इसकी सीमा भारत से नहीं लगती है। बलूचिस्तान अरब सागर के किनारे स्थित है। इसकी तटरेखा लगभग 77 किलोमीटर है, जो इसके रणनीतिक महत्व को काफी ज्यादा बढ़ाती है। इसी सूबे में गहरे पाने का बंदरगाह ग्वादर भी है, जिसे चीन सीपीईसी प्रोजेक्ट के जरिए विकसित कर रहा है।

    बलूचिस्तान की आबादी?

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान की आबादी लगभग 1.5 करोड़ है। इसमें लगभग 52% बलूच, 36% पश्तून और बाकी ब्राहुई, हजारा और अन्य समुदायों के लोग हैं। बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा है। यह सूबे का सबसे बड़ा शहर भी है, जिसकी आबादी लगभग 16 लाख है। इसके बाद बलूचिस्तान के दूसरे बड़े शहरों में तुरबत और खुजदार शामिल हैं।

    पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान जरूरी क्यों?

    बलूचिस्तान सूबा प्राकृतिक खनिजों से समृद्ध है, जिसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों में प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा और कोयला शामिल हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अहम अंतरराष्टीय समुद्री मार्ग के पास स्थित होने के कारण इस सूबे का रणनीतिक महत्व अधिक है। बलूचिस्तान दुर्लभ पृथ्वी तत्वों से भी समृद्ध है। यही कारण है कि चीन और अमेरिका दोनों की नजरें बलूचिस्तान पर टिकी हैं।

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