BNP सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन क्या बना पाएगी सरकार?
सर्वे के मुताबिक, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) कुल वोट शेयर के मामले में सबसे आगे है, जबकि भारत विरोधी जमात की लीडरशिप वाला इलेक्टोरल अलायंस उन सीटों पर आगे है जहां जीत पक्की लग रही है। सर्वे में आगे कहा गया है कि जमात के नेतृत्व वाला गठबंधन 105 सीटें जीत सकता है, जबकि BNP की लीडरशिप वाला अलायंस 101 सीटें अपनी झोली में डाल सकता है। सर्वे से यह भी पता चला है कि दोनों गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच कम से कम 75 सीटों पर कांटे की टक्कर है। ऐसे में यही 75 सीट तय करेंगे कि बांग्लादेश में किसकी सरकार बनती है और किसे विपक्ष में बैठना पड़ेगा।
बांग्लादेशी संसद में कुल कितनी सीटे हैं?
बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सीटें हैं। इनमे से 300 सदस्य सीधे लोगों के जरिए चुने जाते हैं। वहीं, 50 सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। हालांकि, इनके लिए आम नागरिक मतदान नहीं करते हैं। बल्कि, चुनावों में 300 सीटें जीतने वाली पार्टियों को उनके अनुपात के हिसाब से महिला सांसदों को मनोनीत करने की शक्ति दे दी जाती है। हालांकि, इसका नकारात्मक पहलू यह है कि बांग्लादेशी महिलाएं आम चुनाव ज्यादा संख्या में नहीं लड़ पाती हैं, जिससे आधी आबादी को नीति निर्धारण में उचित भागीदारी नहीं मिलती।
बांग्लादेश चुनाव में BNP को साफ बढ़त
एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट (EASD) के एक अलग सर्वे में BNP के नेतृत्व वाले अलायंस को बढ़त मिलते हुए दिखाया गया है। EASD के अनुसार, BNP के नेतृत्व वाला अलायंस चुनाव में लगभग 208 सीटें जीत सकता है। सर्वे में बताया गया है कि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले अलायंस को 46 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि जातीय पार्टी तीन सीटें जीत सकती है। सर्वे में कहा गया है कि दूसरी पॉलिटिकल पार्टियों को चार सीटें मिलने की उम्मीद है और स्वतंत्र उम्मीदवार 17 सीटें जीत सकते हैं।
बांग्लादेश चुनावी सर्वेक्षण भारत के लिए कैसा
बांग्लादेश के चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को भारत के लिए मिला-जुला माना जा रहा है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वे के अनुसार, बांग्लादेश में BNP उस लिबरल-सेंट्रिस्ट जगह पर कब्जा कर रही है जो कभी अवामी लीग के पास थी। उनका मानना है कि अगर BNP सच में बांग्लादेश में अगली सरकार बनाती है, तो भारत तारिक रहमान के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश करेगा। वहीं, दूसरी ओर इस्लामिस्ट पार्टी जमात-ए-इस्लामी का रुख साफ तौर पर भारत विरोधी है। जमात के साथ नई बनी स्टूडेंट्स पार्टी एनसीपी भी है, जो शेख हसीना के कारण भारत का विरोध कर रही है।













