जमात ने भारत से मजबूत संबंध की प्रतिबद्धता जताई
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने कहा, ”हम अपने पड़ोसी देशों और दुनियाभर के मित्रों के साथ सकारात्मक और बेहतर संबंध स्थापित करना चाहते हैं। भारत हमारा निकटतम पड़ोसी है और यह हमारी प्राथमिकता बना रहेगा। हमारा लक्ष्य संघर्ष उत्पन्न करना नहीं, बल्कि विकास और शांति के लिए साझेदारी का निर्माण करना है। इसके लिए आपसी सम्मान और विश्वास अत्यंत आवश्यक हैं।”
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का बुरा हाल
बांग्लादेश में 2024 के उस हिंसक आंदोलन के बाद पहली बार आम चुनाव होंगे, जिसके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटना पड़ा था।
देश में 11 राजनीतिक दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाले गठबंधन की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है। अल्पसंख्यकों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को दूर करते हुए बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने किसी भी प्रकार के भेदभाव को खारिज कर दिया।
जमात ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का भरोसा दिया
उन्होंने अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर कहा, ”उनका धर्म कोई भी हो, वे सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। मेरे देश में कोई भी दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं है। मैं किसी को भी अल्पसंख्यक नहीं मानता। हम सभी बांग्लादेशी हैं, और हर कोई प्रथम श्रेणी का नागरिक है। हम अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक होने के आधार पर विभाजन का समर्थन नहीं करते।”
बांग्लादेश में समावेशी विकास की बात की
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि प्रगति वास्तविक समावेशन पर निर्भर करती है। शफीकुर रहमान ने कहा, ”समावेश के बिना हम एक देश के रूप में प्रगति नहीं कर सकते। लेकिन, समावेश का अर्थ लोगों को विभाजित करना नहीं है। इसका अर्थ यह स्वीकार करना है कि हम सभी सबसे पहले बांग्लादेशी हैं।” बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समूह हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग आठ प्रतिशत हैं।













