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  • बांग्लादेश चुनाव से पहले फिर हिंसा, दुकान में घुसकर हिंदू कारोबारी की बेरहमी से हत्या, भारत में आक्रोश

    ढाका: बांग्लादेश में चुनाव से पहले एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया गया है। सोमवार देर रात मैमनसिंह जिले में एक हिंदू व्यापारी की उसकी दुकान के अंदर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया है कि मरने वाले की पहचान 62 साल के सुशेन चंद्र सरकार के रूप में हुई


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    By Azad Hind Desk फरवरी 10, 2026
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    ढाका: बांग्लादेश में चुनाव से पहले एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया गया है। सोमवार देर रात मैमनसिंह जिले में एक हिंदू व्यापारी की उसकी दुकान के अंदर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया है कि मरने वाले की पहचान 62 साल के सुशेन चंद्र सरकार के रूप में हुई है। वह साउथकांडा के रहने वाले थे। सुशेन चावल व्यापारी थे और त्रिशाल उपजिला के बोगर बाजार में उनकी ‘मेसर्स भाई भाई एंटरप्राइज’ नाम से एक दुकान थी। इस हत्या के बाद भारत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने बांग्लादेश को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दी है।

    हमलावरों ने दुकान में घुसकर की हत्या

    मैमनसिंह जिला पुलिस ने बताया है कि यह घटना रात करीब 11 बजे हुई। सुशेन चंद्र सरकार अपनी दुकान के अंदर मौजूद थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमलावरों ने हत्या करने के बाद दुकान का शटर गिरा दिया और शव को अंदर छोड़कर मौके से फरार हो गए। बाद में स्थानीय लोगों ने शटर को आधा खुला देखा तो उन्हें कुछ शक हुआ। अंदर देखने पर सरकार की लाश पड़ी हुई नजर आई।

    बांग्लादेश की पुलिस ने क्या बताया

    त्रिशाल पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज मुहम्मद फिरोज हुसैन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि अपराधियों को ट्रैक करने और उनकी पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि हत्या के पीछे का मकसद अभी पता नहीं चला है। हालांकि, प्रथम दृष्टया मामला लूट का प्रतीक होता है।

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा लगातार जारी है। मोहम्मद यूनुस सरकार के दौरान इसमें काफी तेजी देखी गई है। हालांकि, बांग्लादेशी सरकार इसे व्यवस्थित उत्पीड़न मानने को तैयार नहीं है। 18 जनवरी 2026 को दीपू चंद्र दास की हत्या ने पूरे बांग्लादेश को हिलाकर रख दिया था। एक फैक्ट्री मजदूर दीपू दास की ईशनिंदा के झूठे आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनके शव को सरेआम जला दिया गया था।

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