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  • बांग्लादेश में नई लड़ाई का मैदान तैयार, तारिक रहमान ने आर्मी चीफ के ‘दुश्‍मन’ को बनाया विदेश मंत्री, बढ़ेगी रार!

    ढाका: बांग्लादेश में मंगलवार को नई सरकार का गठन हो गया है। बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान के कैबिनेट में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक अहम नाम डॉक्टर खलीलुर्रहमान का है। यूनुस सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) खलीलुर्रहमान बीएनपी सरकार में विदेश मंत्री बने हैं। अमेरिका समर्थक खलीलुर्रहमान को इतना


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    By Azad Hind Desk फरवरी 18, 2026
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    ढाका: बांग्लादेश में मंगलवार को नई सरकार का गठन हो गया है। बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान के कैबिनेट में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक अहम नाम डॉक्टर खलीलुर्रहमान का है। यूनुस सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) खलीलुर्रहमान बीएनपी सरकार में विदेश मंत्री बने हैं। अमेरिका समर्थक खलीलुर्रहमान को इतना अहम मंत्रालय मिलने से ढाका की विदेश नीति में बदलाव के साथ-साथ देश की अंदरूनी राजनीति में हलचल मच सकती है। इसकी वजह आर्मी चीफ वकार-उज-जमां और खलीलुर्रहमान की तनातनी है।

    नॉर्थईस्टन्यूज के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान एनएसए खलीलुर्रहमान काफी प्रभावी थे। उनको यूनुस प्रशासन में अमेरिका के ‘प्रतिनिधि’ के तौर पर देखा जाता रहा। एनएसए के तौर पर खलील कई दफा विवादों में आए लेकिन वह नई सरकार में सबसे अहम पदों में से एक लेने में कामयाब रहे हैं। विशेशज्ञों का कहना है कि खलील के रूप में ढाका में अमेरिकी प्रभाव बना रहेगा।

    खलील का विदेश मंत्री बनना डील का हिस्सा!

    तारिक रहमान की कैबिनेट में एकाएक खलीलुर्रहमान का विदेश मंत्री बनना पर्दे के पीछे किसी ‘संदिग्ध डील’ का नतीजा लगता है। अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील और बोइंग एयरक्राफ्ट खरीद में अहम किरदार निभाने वाले खलील का नाम अचानक आया और सांसद ना होने के बावजूद ‘टेक्नोक्रेट’ कोटे से उनको मंत्री पद मिल गया।

    खलील को विदेश मंत्री का पद मिलने से ढाका के सियासी गलियारे और बीएनपी में कई तरह की चर्चाएं हैं। ढाका की राजनीति के जानकार खलीलुर्रहमान के विदेश मंत्री बनने पर ना सिर्फ हैरत जता रहे हैं बल्कि एक नई तनातनी का भी संकेत दे रहे हैं। ये तनातनी खलीलुर्रहमान और आर्मी चीफ वकार उज जमां के बीच है।

    खलील-वकार का झगड़ा

    मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में कई मुद्दों पर खलीलुर्रहमान और वकार जमा में खींचतान देखी गई थी। दोनों की एक-दूसरे को कमजोर करने की कोशिशें भी सामने आती रहीं। दोनों का झगड़ा पहली बार मई 2025 में खलील के म्यांमार के लिए रखाइन ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर बनाने की कोशिशों के बाद आया।

    खलीलुर्रहमान ने मानवीय कॉरिडोर की वकालत की तो जनरल जमां ने खुलकर इसका विरोध किया। जमां ने इसे ‘खूनी कॉरिडोर’ कहते हुए ऐलान कर दिया कि ऐसा कोई गलिया नहीं बनने दिया जाएगा। इस मामले में खलीलुर्रहमान अमेरिकी भाषा बोलते दिखे तो जमां ने सख्त रुख दिखाया। ये मामला अभी हल नहीं हो सका है।

    खलीलुर्रहमान की एंट्री पर बैन

    खलीलुर्रहमान और वकार जमां के रिश्ते में तनाव को इससे समझा जा सकता है कि उन्होंने ढाका कैंटोनमेंट में खलील की एंट्री पर बैन लगा रखा है। खलीलुर्रहमान ने बड़ा दांव खेलते हुए लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के पद पर शिफ्ट करने की कोशिश करके आर्मी में ‘तख्तापलट’ की साजिश रची।

    खलीलुर्रहमान का प्लान सेना में शीर्ष स्तर पर अपने लोगों को पहुंचाकर जनरल जमां को कमजोर करने का था। हालांकि जमां ने इसे पहचान लिया और खलीलुर्रहमान के चेहेते अफसरों का रास्ता रोक दिया। इसी तनातनी की वजह से 31 जनवरी, 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल शमीम के जाने के बाद से CGS का पद खाली पड़ा है।

    खलील बढ़ाएंगे जमां की टेंशन

    खलीलुर्रहमान को विदेश मंत्री पद जैसा ताकतवर पद मिलने से साफ है कि वह जनरल जमां की टेंशन को बढ़ाना जारी रखेंगे। एक्सपर्ट का कहना है कि खलील आर्मी के काम करने के तरीके पर शायद सीधे-सीधे असर नहीं डाल पाएंगे लेकिन वे जनरल जमां के लिए एक कांटे की तरह बने रहेंगे।

    जनरल जमां जून 2027 में रिटायर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अपने रिटायरमेंट से पहले जमां आर्मी में अपने वफादार अफसरों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे ताकि वह खलीलुर्रहमान के किसी नए खतरे का सामना कर सकें, जो अमेरिकी शह पर उनकी मुश्किल को बढ़ा सकते हैं।

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