दास को इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में ले जाया गया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में उनकी पत्नी के हवाले से बताया गया कि दुकान बंद करने के बाद उन पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि ‘मुझे नहीं पता कि यह किसने किया। हमें इंसाफ चाहिए। मेरे पति एक सीधे-साधे इंसान थे। उन्होंने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।’
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले
खोकन दास की मौत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर किए गए हालिया हमलों की कड़ी का हिस्सा है। बांग्लादेश पिछले दो सप्ताह में किसी हिंदू पर यह चौथा ऐसा हमला है, जिसकी रिपोर्ट सामने आई है। इसके पहले 18 दिसम्बर की शाम को मैमनसिंह जिले में एक भीड़ ने फैक्ट्री मजदूर दीपू चंद्र दास को पीट-पीटकर मार डाला था। इसके बाद उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई थी।
27 साल के दीपू चंद्र दास पर उसके साथ ही काम करने वाले एक शख्स ने पैगम्बर मोहम्मद के अपमान का आरोप लगाया था। खास बात रही कि जिस फैक्ट्री में दीपू काम करता था, उसके अधिकारियों ने पुलिस को सूचना देने के बजाय उसे भीड़ के हवाले कर दिया। बाद में अधिकारियों ने बताया कि उन्हे जांच के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो साबित करता हो कि दीपू ने पैगंबर के अपमान को लेकर कोई टिप्पणी की थी।














