फिर भी, पाकिस्तान के आर्मी चीफ जिस ‘डिफेंस डॉक्ट्रिन’ पर काम कर रहे हैं, उसमें पाकिस्तान को इस्लामिक देशों का ‘लीडर’ की तरह पेश करने की है। असीम मुनीर, इस्लामिक देशों के बीच पाकिस्तान को ‘रक्षक’ बता रहे हैं। इसी डॉक्ट्रिन की तरह पाकिस्तान, इस्लामिक देशों को लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम, मिलिट्री ट्रेनिंग की पेशकश कर रहा है। भारतीय रक्षा सूत्रों का मानना है कि यह रणनीति, वैश्विक अस्थिरता के बीच पाकिस्तान को स्व-घोषित रक्षक के तौर पर स्थापित करने की कोशिश है।
परमाणु छतरी में इस्लामिक देशों को लाने की कोशिश
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, कई मुस्लिम देश ऐसे हैं, जो क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच खतरों का सामना कर रहे हैं और वो पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की छतरी में आने की ख्वाहिश रखते हैं। सऊदी अरब ने भी पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के साथ इसीलिए रक्षा समझौता किया था। हालांकि, पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों को ना तो किसी देश को ट्रांसफर कर सकता है, ना बेच सकता है और ना ही किसी और देश में परमाणु हथियारों को लैस कर सकता है, फिर भी वो इस्लामिकर देशों को रणनीतक गारंटी देने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया है कि ऐसे आठ मुस्लिम देश हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के साथ डिफेंस पार्टनरशिप की संभावना तलाशी है। इस्लामाबाद ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8 अरब डॉलर के डिफेंस एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल किए हैं और अगले तीन से पांच सालों में हथियारों की बिक्री से 20 अरब डॉलर तक का टारगेट रखा है। हालांकि ये दावे गलत हैं, क्योंकि अगर ये डील वाकई हो भी जाती है तो JF-17 में चीन की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है। और मुनाफे का 65 प्रतिशत हिस्सा चीन को जाएगा। भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ये सिर्फ डिफेंस डील नहीं हैं, बल्कि ये एक लंबे समय का जियो-पॉलिटिकल गेमप्लान है। असीम मुनीर इसी प्लान के साथ आगे बढ़ रहे हैं, ताकि इस्लामिक देशों के बीच पाकिस्तान को एक लीडर की तरह दिखाया जाए।














