लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमान के खिलाफ साजिश करने वालों में आखिरी सैन्य अधिकारी थे। उनसे पहले पांच और मेजर जनरलों को भी दूसरे यूनिट्स भेज दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान ने अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के फौरन बाद आर्मी चीफ के खिलाफ एक्टिव हो गये थे। हालांकि शेख हसीना के समय बतौर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस में अपने छोटे से समय के दौरान उन्होंने QMG हेड के तौर पर लो प्रोफाइल बनाए रखा था। लेकिन मोहम्मद यूनुस के समय वो उन जनरलों के ग्रुप में शामिल हो गये थे, जिन्होंने आर्मी चीफ जनरल वकर-उज़-ज़मान के खिलाफ ‘बगावती’ रूख अपनाया था।
बांग्लादेश की सेना में बड़े फेरबदल
नॉर्थ ईस्ट न्यूज के मुताबिक NDC कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल शालीनुल हक, जो अगले साल जनवरी में रिटायर होने वाले हैं, वो जनरल फैजुर रहमान की जगह लेंगे। जनरल फैजुर रहमान के ट्रांसफर के अलावा पांच और जनरलों का ट्रांसफर ऐसे ऐसे पदों पर कर दिया गया है, जिनके खास महत्व नहीं होते हैं।
- इन सैन्य अधिकारियों में मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MIST) के कमांडेंट मेजर जनरल मोहम्मद नसीम परवेज़ शामिल हैं, जिन्हें विदेश मंत्रालय (MOFA) में भेज दिया गया है, जहां वे तब तक रहेंगे जब तक उन्हें विदेश में राजदूत के तौर पर पोस्ट नहीं किया जाता।
- 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और तंगेल के घाटैल में एक फॉर्मेशन के एरिया कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद हुसैन अल मोर्शेद नए एडजुटेंट जनरल होंगे। वह मेजर जनरल मोहम्मद हकीमुज्जमां की जगह लेंगे जो MIST कमांडेंट का पद संभालेंगे।
- रंगपुर में मौजूद 66वीं इन्फैंट्री डिवीज़न के GOC मेजर जनरल मोहम्मद कमरुल हसन को ढाका में लॉग एरिया का चार्ज संभालने का निर्देश दिया गया है।
पिछले कुछ महीनों से, बांग्लादेश आर्मी चीफ कुछ खास पोस्ट पर अमेरिका और पाकिस्तान के समर्थक जनरलों की मौजूदगी की वजह से परेशान थे। इन अधिकारियों में आर्म्ड फोर्सेज डिवीजन के प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर, लेफ्टिनेंट जनरल एस एम कमरुल हसन भी शामिल थे, जिन्हें MOFA भेजा गया था, जहां वे तब तक “ठहरेंगे” जब तक उन्हें विदेश में कोई असाइनमेंट नहीं दिया जाता। लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन सितंबर 2026 में सर्विस से रिटायर होने वाले हैं। जबकि वो मोहम्मद यूनुस के शासन के समय बांग्लादेश के पूर्व NSA और मौजूदा विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के खास समर्थकों में से थे।












