8 साल पहले इसी मंदिर से 6 बेशकीमती अष्टधातु मूर्तियां चोरी हुईं। इनका आज तक पता नहीं चला। 2 दिन पहले रोहतास के ठाकुरबाड़ी से अष्टधातु मूर्तियां चोरी हुईं। हालांकि अकोढ़ी गोला पुलिस ने मूर्तियां बरामद करते हुए चोरों को पकड़ लिया। पिछले कुछ समय में बार-बार इस तरह की चोरियां हो रही हैं। सवाल ये है कि आखिर इन चोरियों के पीछे कौन है? क्या बिहार में कोई बड़ा गैंग सक्रिय हो गया है जो इन प्राचीन मूर्तियों को चोरी करने में लगा हुआ है?
अष्टधातु मूर्ति चोरी का ताजा मामला
समस्तीपुर जिले के हसनपुर प्रखंड में यह चोरी हुई। चोरों ने रविवार को रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए गर्भगृह में घुसकर इन मूर्तियों को चुराया। हालांकि पुलिस को सोमवार को तब इस बारे में जानकारी मिली, जब उन्होंने पूजा के लिए मंदिर के दरवाजे खोले। पुलिस और फोरेंसिक एक्स्पर्ट मौके पर पहुंच गए हैं और सबूत जुटा रहे हैं। इस मंदिर को ‘छोटी ठाकुरवाड़ी’ कहा जाता है और यह हसनपुर पुलिस स्टेशन के देवड़ा गांव में है।
राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्ति चोरी, लेकिन हनुमान जी को नहीं छुआ
इस चोरी में एक और हैरान करने वाली बात है कि चोरों ने भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता की मूर्ति तो चुराई, लेकिन हनुमान जी की मूर्ति को नहीं छुआ। हनुमान जी की मूर्ति सुरक्षित है। चोरों ने देर रात मंदिर में घुसपैठ की। ताला तोड़ा और मूर्तियां चोरी करके ले गए।
पुलिस को महंत पर शक
पुलिस को इस चोरी के पीछे महंत पर शक है। हालांकि महंत का दावा है कि रविवार शाम भोग लगाने के बाद वह गांव में एक पूजा में चला गया था। वहां से देर रात लौटा। फिर अपने कमरे में जाकर सो गया। उनका चोरी से कोई लेना देना नहीं है। महंत 2010 से यहां पूजा कर रहे हैं। पुलिस का शक इसलिए भी गहरा रहा है क्योंकि चोरों के ताले तोड़ने का शोर महंत को कैसे सुनाई नहीं दिया। मंदिर में कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। इसलिए श्रमिक और मजदूर यहां रहते हैं।
बार-बार चोरी हो रही है मूर्तियां
पिछले महीने जनवरी में आरा के ठाकुरबाड़ी मंदिर से राम-जानकी, लक्ष्मण और लड्डू गोपाल को चुरा लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इसका पता भी अगले दिन सुबह तभी चला, जब गांववाले पूजा के लिए वहां पहुंचे। औरंगाबाद के बरौली गांव से भी अष्टधातु मूर्तियां और हनुमान मंदिर से चांदी का मुकुट चुरा लिया गया। ये चोरियां तब हो रही हैं, जब बिहार में मंदिरों को सुरक्षित रखने के लिए चाहरदीवारी निर्माण योजना जारी है। इस योजना के तहत मंदिरों को चारदीवारी करने के लिए सरकार की ओर से बजट दिया जाता है।
अष्टधातु की मूर्तियां कीमती क्यों
अष्टधातु मूर्तियां 8 धातुओं के मिश्रण से तैयार होती हैं। इनमें सोना, चांदी, तांबा, सीसा, टिन, लोहा और पारा होता है। ये मूर्तियां सदियों पुरानी होती हैं। कुछ मूर्तियां तो 1000 साल से भी ज्यादा पुरानी है। इन मूर्तियों की खासियत है कि हजारों साल के बाद भी ये खराब नहीं होती हैं। ब्लैक मार्केट में इनकी कीमत करोड़ों में है। अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में इनकी बहुत मांग है।
अष्टधातु मूर्ति चोरी का प्रमुख केंद्र बिहार क्यों
बिहार एक तरह से अष्टधातु मूर्तियों की चोरी का प्रमुख केंद्र है। नालंदा, गया, भागलपुर और वैशाली जिले से अष्टधातु की बहुत सी मूर्तियां चोरी हुई हैं। एक और बात है कि नेपाल बिहार से सटा हुआ है। ये मूर्तियां नेपाल के रास्ते बाहर भेज दी जाती हैं।













