• National
  • बेखौफ जज न्यायपालिका की रीढ़, फैसले में गलती पर नहीं हो सकती सजा… सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि एक बेखौफ जज ही स्वतंत्र न्यायपालिका की नींव होता है। ऐसे में किसी जज के फैसले में गलती होने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ दायर की जाने वाली फिजूल शिकायतों पर भी चिंता


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि एक बेखौफ जज ही स्वतंत्र न्यायपालिका की नींव होता है। ऐसे में किसी जज के फैसले में गलती होने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ दायर की जाने वाली फिजूल शिकायतों पर भी चिंता जताई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ऐसी शिकायतों की वजह से ट्रायल कोर्ट के जज जमानत जैसे मामलों में डर-डर कर काम करते हैं। एक ट्रायल जज के बचाव में आते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।

    एमपी हाईकोर्ट से जुड़े मामले में आदेश

    पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक ट्रायल जज की सेवाएं समाप्त कर दी थीं क्योंकि उन्होंने एक आरोपी को जमानत देने में गलती की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस फैसले को पलट दिया है। बेंच ने कहा कि जज के फैसले की शुद्धता नहीं, बल्कि उसके आचरण को देखा जाना चाहिए।

    हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि जब किसी जज के खिलाफ आरोप सच साबित होता है तो हाईकोर्ट को तुरंत दखल देना चाहिए, जिससे न्यायपालिका के अच्छे नाम को खराब करने वालों को बाहर निकाला जा सके। हालांकि, ऐसे केस में झूठी और गुमनाम शिकायतों का सामना कर रहे जज का बचाव भी करना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि एक बेखौफ जज स्वतंत्र न्यायपालिका की रीढ़ है, ठीक वैसे ही जैसे स्वतंत्र न्यायपालिका खुद उस नींव पर टिकी है जिस पर कानून का शासन टिका है। जस्टिस विश्वनाथन ने मामले में कहा कि एक न्यायिक अधिकारी को कई केसों के फैसला का कठिन कर्तव्य सौंपा जाता है। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि स्वाभाविक रूप से, मामले में एक पक्ष हार जाएगा और नाखुश होकर वापस जाएगा। उनमें से असंतुष्ट तत्व, बदला लेने की चाहत में, फालतू आरोप लगा सकते हैं।

    ‘ट्रायल कोर्ट पर भी काम का ज्यादा दबाव’

    अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट पर भी बहुत अधिक काम का दबाव होता है और जज मुश्किल परिस्थितियों में काम करते हैं। एक दिन में बड़ी संख्या में मामले सूचीबद्ध होते हैं और अधिकांश न्यायिक अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर गलत इरादे से या प्रेरित शिकायतों पर जांच शुरू की जाती है तो ट्रायल कोर्ट के कामकाज पर गंभीर असर पड़ेगा और कर्तव्यों का निडर होकर निर्वहन करना मुश्किल हो जाएगा।

    जजों पर झूठे आरोप तेजी से लगाए जाते हैं: SC

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सिर्फ इसलिए कि कोई आदेश गलत है या फैसले में गलती है, किसी न्यायिक अधिकारी को अनुशासनात्मक कार्रवाई या मुकदमेबाजी के दौर से नहीं गुजरना पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि जब झूठे आरोप तेजी से लगाए जाते हैं, तो न्यायिक अधिकारी प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। यहीं पर हाई कोर्ट को बहुत सावधानी और समझदारी से काम लेना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित ज्यूडिशियल ऑफिसर को पिछली सैलरी के साथ बहाल किया जाए।

    हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत ने पलटा

    सर्वोच्च अदालत ने फैसले में कहा कि जज के खिलाफ लगे आरोप में कोई दम नहीं था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी जज की ईमानदारी पर सिर्फ इसलिए सवाल नहीं उठाया जा सकता क्योंकि उसका कोई आदेश गलत था। यह एक खतरनाक विचार होगा कि ऐसे फैसले और आदेश जो स्पष्ट रूप से वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख नहीं करते हैं, वे अपने आप में बेईमानी वाले फैसले माने जाएं।

    जस्टिस पारदीवाला ने क्या कहा

    जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि सिर्फ शक के आधार पर विभागीय कार्यवाही शुरू करना ही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निचली अदालतों के जज जमानत देने में अपनी विवेक का इस्तेमाल करने से हिचकिचाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जमानत याचिकाओं से भर जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी ट्रायल कोर्ट जज के मन में किसी प्रशासनिक कार्रवाई का डर होने की वजह से, वह किसी हकदार मामले में भी जमानत देने से इनकार कर दे।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।