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  • ‘बेल नहीं है जेल’, पैसे की ठगी में नहीं लागू होगा ये नियम, सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी

    नई दिल्ली: देशभर में पोंजी स्कीम जैसे वित्तीय घोटालों में शामिल आरोपियों को अब आसानी से जमानत नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि लोगों को ठगने वाले पोंजी स्कीम जैसे घोटालों में शामिल ऐसे धोखेबाज, जो लोगों की मेहनत की कमाई छीन लेते हैं, उन्हें गंभीर अपराध की श्रेणी


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    By Azad Hind Desk फरवरी 19, 2026
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    नई दिल्ली: देशभर में पोंजी स्कीम जैसे वित्तीय घोटालों में शामिल आरोपियों को अब आसानी से जमानत नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि लोगों को ठगने वाले पोंजी स्कीम जैसे घोटालों में शामिल ऐसे धोखेबाज, जो लोगों की मेहनत की कमाई छीन लेते हैं, उन्हें गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। इसलिए, उन्हें ‘जमानत नियम है और जेल अपवाद’ वाले सिद्धांत का लाभ नहीं मिलेगा।

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए सुनाया, जिसमें हाई कोर्ट ने एक धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में मुख्य आरोपी को जमानत दे दी थी। यह आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था।

    सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के तर्क को किया खारिज

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी को इस आधार पर जमानत दी थी कि उसके सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और यह मामला मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए यह गंभीर अपराध नहीं है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के इस तर्क को खारिज कर दिया और उच्च न्यायालय के जमानत आदेश को रद्द कर दिया।

    जस्टिस संजय कुमार ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘हम यह बताना चाहेंगे कि समाज के सदस्यों के जीवन और स्वतंत्रता का मूल्य केवल उनके ‘व्यक्ति’ तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता तक भी फैला हुआ है, जिसमें उनकी आर्थिक भलाई भी शामिल है।’

    आर्थिक अपराधियों के लिए जमानत की राह मुश्किल

    जस्टिस कुमार ने यह फैसला एक ऐसे वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में लिखा, जिसमें आर्थिक अपराधियों के लिए जमानत की राह मुश्किल हो गई है। अब उन्हें गंभीर अपराधों के आरोपियों के बराबर माना जाएगा। उन्होंने अपने फैसले में कहा, ‘वित्तीय प्रकृति के अपराधों में, जहां भोले-भाले लोगों को धोखेबाजों द्वारा उनकी मेहनत की कमाई से ठगा जाता है, जो दूसरों की आसानी से भरोसा करने की प्रवृत्ति का फायदा उठाकर जीते हैं, ऐसे आरोपियों की जमानत की अर्जी पर विचार करते समय उपरोक्त कारकों को निश्चित रूप से विचार किया जाना चाहिए।’

    आरोपी द्वारा नाम और पहचान पत्र की जालसाजी करने और लोगों को धोखा देने के इरादे जैसी गतिविधियों का जिक्र करते हुए बेंच ने कहा कि यह दर्शाता है कि वह एक आदतन अपराधी है और समाज के लिए खतरा है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता की अपील को स्वीकार करते हुए आरोपी को जमानत देने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

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