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  • ब्रिक्स की कॉमन करेंसी एजेंडे में नहीं, भारत की प्रेसीडेंसी में ट्रंप को खुश करने वाला ‘रूसी’ प्लान

    नई दिल्ली: ब्रिक्स को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जो सबसे बड़ी आशंका थी, वह दूर हो सकती है। ब्रिक्स के एक महत्वपूर्ण देश रूस के शेरपा और ब्लादिमीर पुतिन के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने साफ किया है कि ब्रिक्स देशों का अपना कोई कॉमन करेंसी बनाने का एजेंडा नहीं है। ट्रंप


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    By Azad Hind Desk फरवरी 12, 2026
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    नई दिल्ली: ब्रिक्स को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जो सबसे बड़ी आशंका थी, वह दूर हो सकती है। ब्रिक्स के एक महत्वपूर्ण देश रूस के शेरपा और ब्लादिमीर पुतिन के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने साफ किया है कि ब्रिक्स देशों का अपना कोई कॉमन करेंसी बनाने का एजेंडा नहीं है। ट्रंप के रवैए से लग रहा था कि वह इससे आशंकित हैं कि अगर ब्रिक्स ने भी यूरोपियन यूनियन की यूरो की तरह कुछ कॉमन करेंसी बना ली तो अमेरिकी डॉलर का जो अभी रुतबा है वह नहीं रह पाएगा।

    क्या ब्रिक्स की कॉमन करेंसी होगी

    ब्रिक्स की प्रेसीडेंसी अभी भारत के पास है। 9 से 11 फरवरी तक दिल्ली में ब्रिक्स देशों के शेरपाओं की बैठक हुई, जिसमें अध्यक्षता के नाते देश का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया। इस दौरान ब्रिक्स में रूस के शेरपा और रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कॉमन करेंसी को लेकर हमारे सहयोगी अखबार ET से कहा, ‘मैं पूरी तरह से स्पष्ट कर दूं कि हम कोई भी एक कॉमन करेंसी स्थापित करने की बात नहीं कर रहे हैं।’

    क्या डॉलर के लिए चुनौती है ब्रिक्स

    उन्होंने आगे बताया कि ‘हमें अपनी राष्ट्रीय करेंसियों के इस्तेमाल को आगे और विस्तार देने की जरूरत है।….यह किसी तरह से डॉलर को कमजोर करने का प्रयास नहीं है।’ ‘राष्ट्रपति पुतिन ने कई बार कहा है कि अगर रूस को डॉलर के इस्तेमाल से वंचित नहीं रखा जाता, तो हमारे पास अभी भी डॉलर होते।’ इसी वजह से उन्होंने राष्ट्रीय करेंसियों को पाबंदियों और दंडात्मक कार्रवाइयों से सुरक्षित रखने की भी वकालत की है।

    ब्रिक्स का करेंसी वाला एजेंडा क्या है

    इस समय रूस विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध की वजह से बहुत सारी पाबंदियां झेल रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े बैंक इससे कट चुके हैं। रूसी शेरपा के मुताबिक ‘ब्रिक्स पश्चिम-विरोधी गठबंधन नहीं है।’ यह अंतरराष्ट्रीय संगठन अपनी राष्ट्रीय करेंसियों का इस्तेमाल सदस्य देशों के बीच आपसी चीजों के निपटारे, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर करना चाहते हैं।

    ब्रिक्स को लेकर ट्रंप को चिंता क्यों है

    दरअसल, जुलाई 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ही सदस्य देशों ने ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स बनाकर क्रॉस बॉर्डर पेमेंट सिस्टम पर चर्चा को आगे बढ़ाया था। इस सिस्टम का मकसद ही ये है कि अंतरराष्ट्रीय लेन-देने के लिए अमेरिकी डॉलर पर से निर्भरता को खत्म करना। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगा कि यह उनके डॉलर के खिलाफ साजिश हो रही है। ट्रंप को हमेशा से लगा है कि ब्रिक्स का मजबूत होना उनके ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के लिए चुनौती साबित हो सकता है।

    ब्रिक्स में कौन-कौन देश शामिल

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस साल भारत में हो रहा है। उसी की तैयारियों को लेकर पहले शेरपाओं की मुलाकात हुई है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साऊथ अफ्रीका ब्रिक्स (BRICS) के फाउंडर मेंबर हैं। इसके बाद इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात,ईरान, इंडोनेशिया, मिस्र और इथियोपिया शामिल हुए। ये सारे ब्रिक्स के पूर्णकालिक सदस्य हैं। जनवरी 2025 से बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान पार्टनर देश के तौर पर इसका हिस्सा हैं।

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