बारामती हादसे में अजित पवार समेत 5 लोगों की गई जान
इससे यह पता लग सकेगा कि असल में इस कंपनी के मालिक वीके सिंह ने 28 जनवरी को इस एयरक्राफ्ट की अच्छी मेंटेनेंस के बारे में जो दावा किया था। उसमें कितनी सचाई है। कहीं ऐसा तो नहीं कि यह एयरक्राफ्ट इसकी तय घंटों की उड़ानों से बहुत अधिक उड़ान भर चुका हो और इसकी उड़ानों के घंटों में कहीं हेरफेर करते हुए समय पर ड्यू इस प्लेन की सर्विस ही ना कराई गई हो। जो कि इस हादसे का एक अहम कारण बना हो, क्योंकि, हादसे से पहले इस प्लेन की कैमरे में कैद जो वीडियो फुटेज वायरल है। उसमें यह प्लेन एक तरफ झुकता नजर आ रहा है।
क्या प्लेन में थी कोई तकनीकि खराबी? हर एंगल से जांच
ऐसे में जानकारों का कहना है कि इससे लगता है कि या तो प्लेन में लैंडिंग से पहले ही कोई तकनीकी खराबी आ गई थी, या इसका इंजन फेल हुआ या फिर कुछ और मसला हुआ। हालांकि, यह सब जांच के बाद ही पता लग सकेगा। लेकिन, डीजीसीए और एएआईबी को इस प्लेन की कुंडली भी जरूर निकालनी चाहिए। जो कि केवल प्लेन के लॉगबुक से नहीं निकलेगी।
इसके लिए डीजीसीए को इस प्लेन में फ्यूल भरवाने वाले कारनेट फ्यूल कार्ड और हर उड़ान से पहले संबंधित एटीसी को अपना फ्लाइट प्लान सबमिट करने वाले फ्लाइट प्लान से इसका खुलासा हो सकेगा। फिर पता लगेगा कि असल में इस प्लेन ने कितने घंटों तक उड़ान भरी थी और लॉग बुक में उसे कितने घंटे दिखाया गया था।
इन तीन फैक्ट से प्लेन की फिटनेस स्थिति का खुलासा
अगर यह तीनों फैक्ट आपस में मेल खाते हैं तो ही प्लेन को पूरी तरह से फिटनेस की एनओसी दी जा सकती है, वरना नहीं। क्योंकि, सूत्र इस बात की प्रबल आशंका जता रहे हैं कि प्राइवेट चार्टर्ड प्लेन सर्विस देने वाले अधिकतर ऑपरेटर हवाई जहाजों की मेंटेनेंस और सर्विस में लुकाछिपी का खेल खेलते हैं। जिसमें प्लेन की डयू टाइम पर सर्विस नहीं कराई जाती। लेकिन लॉग बुक में उसे समय से ही सर्विस करना दिखाया जाता है।
ऐसे में हो सकता है कि प्लेन की सर्विस काफी देरी से हुई हो और इसमें कोई तकनीकी खराबी आई हो। यह आशंका इसलिए भी मजबूत होती दिख रही है। जिसमें डीजीसीए ने जब विजिबिलिटी को तीन हजार मीटर बताया था। लेकिन इसके बावजूद दोनों पायलट में से किसी को रनवे दिखाई नहीं दे रहा था।













